कोरबा में ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ फर्जीवाड़ा: एक महीने का अल्टीमेटम फेल, श्रम विभाग की चुप्पी पर भड़का मजदूर संघ, आंदोलन की चेतावनी

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बहुचर्चित ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ के तहत हुए फर्जीवाड़े में श्रम विभाग की संदिग्ध चुप्पी और उदासीनता अब चरम पर पहुँच गई है। छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ द्वारा सहायक श्रमायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन और 7 दिनों के अल्टीमेटम को पूरा एक महीना बीत चुका है, लेकिन विभाग की ओर से न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कुछ बोलने को तैयार हैं।
हालात यह हैं कि जवाब मांगने पर जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाने से भी कतरा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ ने गत 25 जून को श्रम विभाग को ज्ञापन सौंपकर 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। संघ का आरोप है कि विभाग की अपनी ही आधिकारिक जांच रिपोर्ट (पत्र क्र./बी.ओ.सी./स.श्र.को./2026/27) में यह बात लिखित रूप से स्वीकार की जा चुकी है कि कोरबा जिले में जन्म प्रमाण पत्र और जच्चा-बच्चा कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कूट-रचना (फर्जीवाड़ा) कर शासन की कल्याणकारी राशि का अवैध आहरण किया गया है।
जांच में कुल 50 फर्जी प्रकरणों की पहचान की गई थी, लेकिन विभाग ने लीपापोती करते हुए केवल 21 मामलों में ही आधी-अधूरी वसूली की। बाकी बचे 29 मामलों में अब तक न तो एक भी पैसा वसूला गया है और न ही फर्जीवाड़ा करने वाले आवेदकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई है।
छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ की प्रमुख मांगें:

  • आपराधिक मामला (FIR): फर्जीवाड़े में संलिप्त तत्कालीन विभागीय श्रम निरीक्षकों, उप-निरीक्षकों और कल्याण निरीक्षकों के खिलाफ आईपीसी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए।
  • शत-प्रतिशत वसूली: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासन को चूना लगाकर लूटी गई पूरी राशि की त्वरित जब्ती और वसूली सुनिश्चित हो।
  • जेल की सलाखों के पीछे जाएं अपात्र: फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले अपात्र आवेदकों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
    अब सड़कों पर उतरेगा संघ, उग्र आंदोलन की चेतावनी
    एक महीने के लंबे इंतजार और प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ के जिलाध्यक्ष निलेश कुमार साहू ने कड़े शब्दों में कहा है कि जब जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाना बंद कर दें और लिखित अल्टीमेटम को पूरी तरह नजरअंदाज करें, तो मजदूरों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता।
    संगठन जल्द ही कोरबा स्थित श्रम कार्यालय का घेराव कर एक विशाल और उग्र जन-आंदोलन का आगाज करने जा रहा है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी श्रम विभाग और जिला प्रशासन की होगी।
    कल्याणकारी योजनाओं में इस तरह की लीपापोती और प्रशासनिक संरक्षण से मजदूरों में भारी रोष व्याप्त है। अब देखना यह होगा कि इस तीखे विरोध के बाद शासन-प्रशासन नींद से जागता है या अपना मौन व्रत जारी रखता है।
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