डेक्कन-डायरी: तमिलनाडु में अब अन्नामलै की नई भूमिका….!

@• डॉ. सुधीर सक्सेना
अन्नामलै कुप्पुस्वामी यानि के. अन्नामलै का त्यागपत्र पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन अंतत: स्वीकार कर लिया है और इसी के साथ ही भावी कदमों को लेकर उन्होंने नया संगठन बनाने की घोषणा कर दी है, जो भविष्य में राजनितिक भूमिका में नजर आएगा। स्पष्ट है कि नितिन नबीन, अमित शाह और बीएल संतोष से उनकी वार्ताएं विफल रहीं। पार्टी उन्हें फ्री हैंड देने और लंबी चौड़ी मांगे मानने को तैयार नहीं हुई। फलत: अब वह अपनी पारी अपने तरीके से आगाज करने को स्वतंत्र हैं। समझा जा रहा है कि वह पार्टी से बेतरह क्षुब्ध थे और उन्होंने इसी रौ में राज्यसभा का ऑफर भी ठुकरा दिया। उनके रवैये ने इसी पुष्टि कर दी कि प्रदेश बीजेपी के मुखिया एन. नगेन्द्रन से उनकी पटरी नहीं बैठ रही है और पार्टी को मजबूत करने का उनका खाका शीर्ष-नेतृत्व को मंजूर नहीं है।
अन्नामलै की उम्र ज्यादा नहीं है। यही कोई 42 वर्ष। चार जून को वह 42 वर्ष के हो गये। वह किसी राजनीतिक घराने में नहीं जनमे। वह करूर में थोटमपट्टी में पैदा हुये। पीएसजी कालेज से इंजीनियरिंग में उपाधि के बाद उन्होंने आईआईएम, लखनऊ में शिक्षा प्राप्त की और भारतीय पुलिस सेवा में रहे। सहायक पुलिस अधीक्षक से शुरू कर वह पुलिस उपायुक्त पद तक पहुंचे। वह पश्चिमी तमिलनाडु के प्रभावशाली कुलक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। बतौर आईपीएस अफसर उन्होंने उडूपी में अपराध नियंत्रण के लिये प्रभावी कदम उठाये। तदंतर मणिपाल में उन्होंने नशाखोरी के खिलाफ मुस्तैदी से जनजागृति अभिान चलाया। बेंगलूरू दक्षिण में उपायुक्त पद तक पहुंचने तक उनकी ख्याति बतौर ‘सिंघम’ चतुर्दिक फैल गयी थी।
यह मानने के पर्याप्त कारण है कि अन्नामलै महत्वाकांक्षी व्यक्ति हैं। इसी के चलते उन्होंने मई, 2019 में पद से इस्तीफा दे दिया। कयासों को विराम देते हुये अगले ही साल अगस्त में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और प्रदेश ईकाई के उपाध्यक्ष बन गये। शिखर नेतृत्व की नजरों में चढ़ने का ही नतीजा था कि अगले ही वर्ष आठ अगस्त, 2021 मो वह एल. मुरूगन को अपदस्थ कर तमिलनाडु, बीजेपी के मुखिया हो गये। जुलाई, 23 से फरवरी, 24 के दरम्यान उन्होंने ‘एनमन्न एन मक्काल’ (हमारी धरती, हमारे लोग) यात्रा निकाली और बीजेपी को प्रदेशों में ओरछोर फैला दिया। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी शिरकत की।
अन्नामलै तुर्श जुबां उग्र नेता हैं। उनकी आडियो श्रंखला डीएमके फाइल्स पर मामला अदालत में गया और उन्हें चेतावनी भी मिली। अन्नदुरै और जयललिता पर तीखी बयानबाजी महंगी पड़ी और अन्नाद्रमुक ने सहयोग से हाथ खींच लिया। उन्होंने पीएमके, टीएमसी और एएमएमके से भी हाथ मिलाया, लेकिन भाजपानीत गठबंधन संसदीय चुनाव में चारों खाने चित हो गया। डीएमके ने अपने सहयोगियों के साथ सभी 39 सीटें जीत लीं। और तो और कोयंबटूर में अन्नामलै को एक लाख से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा। रही सही कसर उनकी अन्नाद्रमुक नेता पलनीस्वामी की निंदा ने पूरी कर दी। अंतत: अन्नद्रमुक ने बीजेपी से संबंध विच्छेद कर लिये। इस बीच एक और घटना यह घटी कि अन्नामलै को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नगेंद्रन को अध्यक्ष बना दिया गया। बताते हैं कि इसके पीछे पलनीस्वामी की जिद की अहम भूमिका थी। बहरहाल, हाल के असेंबली चुनाव में उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ा। खिन्न होकर उन्होंने स्वयं भी चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया और अंततोगत्वा पार्टी की ओर से पीठ फेरने का फैसला किया।
राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में उभरने के बावजूद अन्नामलै असफल नेता है। सन 2024 में कोयंबटूर के गढ़ से लोस चुनाव हारने के पूर्व अन्नामलै सन 2021 में अरवाकुरीचि से असेंबली चुनाव हार चुके हैं। बावजूद इसके उभरते सितारे और संभावनाशील नेता के तौर पर अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की उन पर निगाह है। इसी का नतीजा है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और डायस्पोरा संबंधित आयोजनों में बुलाया गया। सन 2022 और 2023 में वे श्रीलंका गये। सन 2023 में उन्हें नेहरू सेंटर, लंदन में इंडिया ग्लोबल फोरम में बुलाया गया। ब्रिक्स से जुड़े एक आयोजन में शिरकत के लिए वह बीजेपी के चार सदस्यों के शिष्ट मंडल के नेता के तौर पर जोहांसबर्ग भी गये। सन 2024 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी के एक फेलोशिप प्रोग्राम में भी भाग लिया। इसी क्रम में सन 2025 और सन 2026 को उन्होंने अमेरिका में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की स्टैनफोर्ड इंडिया कांफ्रेंस में तेजस्वी सूर्या और शशि थरूर जैसे सांसदों के साथ बतौर वक्ता शिरकत की।
स्पष्ट है कि अन्नामलै विश्व परिदृश्य में उभरते चेहरों में शामिल है। यूं भी उन्हें सुर्खियों में रहने का शौक है। वह जहरबुझे बयानों के लिये तो जाने ही जाते हैं, बेशकीमती घड़ी और काश्त खरीदी के लिये भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। एक बारगी उन्होंने स्वयं को कोड़े लगाने और द्रमुक को सत्ता से हटाने तक जूते नहीं पहनने का ऐलान किया था। नगेंद्रन की मनुहार पर वह बमुश्किल माने थे। उनकी सबसे बड़ी सफलता यह है कि सन 2021 के असेंबली चुनाव में उन्होंने बीजेपी का मत-प्रतिशत तीन से 11 फीसद तक पहुंचा दिया था। उनकी उपेक्षा के बाद मत-प्रतिशत के मान से तमिलनाडु में बीजेपी ‘पुनर्मुषकोभव’ यानि तीन प्रतिशत मत की स्थिति में पहुंच गयी है। अब उन्होंने नयी पार्टी का गठन कर लिया है। थलपति विजय और पवन कल्याण की कामयाबी के दृष्टांत उनके सामने हैं। वह रजनीकांत और अजित के संपर्क में बताये जाते हैं। वह मक्कल शक्ति इयक्कम (लोक शक्ति आंदोलन) भी छेड़ सकते हैं। बहरहाल, अन्नामलै का इस्तीफे का प्रसंग अलबेला है। ऐसा दर्जनों बार हुआ है कि लोगों ने इस्तीफे का प्रेसवार्ता में ऐलान किया अथवा खबर भेजी अथव ट्वीट किया। इस्तीफा लेकर कोई आलाकमान की दर तक नहीं जाता। यह बहुत कुछ ‘म्युचुअल डाइवोर्स’ सरीखा लगता है। यह रजामंदी से तलाक जैसा राजनीतिक प्रसंग है। रिश्ते टूट जाएं और जुड़ें तो गांठ भी न पड़े। बताते हैं कि अन्नामलै बीजेपी संगठन पर एकछत्र राज और निष्कंटक संचालन चाहते थे। वह बीजेपी नेतृत्व को खफा भी नहीं करना चाहते थे और इच्छापूर्ति भी चाहते थे। उनकी जुबां बीजेपी की पॉलिसी के अनुरूप और उसके पास अन्नामलै का कोई विकल्प या स्थानापन्न भी नहीं है। केन्द्रीय सूत्रधारों ने इसका भी आकलन किया होगा कि क्या अन्नामलै पार्टी के बाहर रहकर पार्टी के लिए ज्यादा मददगार हो सकते हैं? यह भेदभरा खेल पार्टी अनेक प्रदेशों में बखूबी खेल चुकी है।
बहरहाल, अब गेंद अन्नामलै के पाले में है और उन्हें सियासत के मैदान में टिके रहने की अपनी कुव्वत का सुबूत देना है।
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