तीरंदाजी (आर्चरी) प्रशिक्षण शिविर में धनुर्धर तैयार हो रहे खेल मैदान में

लेमरू, देवपहरी से लेकर कोरबा क्षेत्र के खिलाडियों ने जीते पुरस्कार
कोरबा 05 जून। जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने की दिशा में लगातार सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। कोरबा स्थित एसईसीएल के मैदान में इन दिनों तीरंदाजी (आर्चरी) का विशेष प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ी पूरे उत्साह, अनुशासन और समर्पण के साथ अपनी प्रतिभा को तराशने में जुटे हुए हैं। सुबह से लेकर शाम तक मैदान में खिलाडियों का अभ्यास, लक्ष्य पर सटीक निशाना साधने की उनकी लगन और बेहतर प्रदर्शन की चाह स्पष्ट दिखाई देती है।
प्रशिक्षण शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खिलाडियों को अनुभवी प्रशिक्षक भरत यादव का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। वर्षों के अनुभव और तकनीकी दक्षता के बल पर भारत यादव ने अनेक प्रतिभाशाली धनुर्धरों को तैयार किया है। उनके प्रशिक्षण में निखरे खिलाडियों ने जिला, संभाग, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर कोरबा का नाम रोशन किया है। वे केवल तीर चलाने की तकनीक ही नहीं सिखाते, बल्कि खिलाडियों में आत्मविश्वास, धैर्य, एकाग्रता और खेल भावना का भी विकास करते हैं।
कोरबा जिले के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों देवपहरी तथा गढ़उपरोड़ा, लेमरू के युवा धनुर्धर भी इस प्रशिक्षण का लाभ उठा रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन खिलाडियों ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह साबित किया है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। उचित मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और सफलता पाने का दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वाले खिलाडियों का कहना है कि उन्हें यहां आधुनिक तकनीकों और प्रतियोगी स्तर की तैयारियों की जानकारी मिल रही है, जिससे भविष्य में बड़े मंचों पर बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास बढ़ा है। वहीं प्रशिक्षक भारत यादव का मानना है कि कोरबा जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें सही दिशा और अवसर देने की है।
खेल विशेषज्ञों का भी मानना है कि तीरंदाजी जैसे पारंपरिक और चुनौतीपूर्ण खेल में कोरबा के खिलाडियों की बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में जिले को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है। यदि ऐसे प्रशिक्षण शिविर नियमित रूप से आयोजित होते रहे और खिलाडियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाते रहे, तो निकट भविष्य में कोरबा से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलना कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
यह प्रशिक्षण शिविर केवल खेल कौशल विकसित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को अनुशासन, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश भी दे रहा है। कोरबा के उभरते धनुर्धरों की आंखों में बड़े सपने हैं और उनके हाथों में धनुष-बाण। यही सपने और यही समर्पण आने वाले वर्षों में जिले को तीरंदाजी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आधार बन सकते हैं।
