एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन की लचर सुरक्षा व्यवस्थाः भीषण गर्मी में धधक उठा कोयला स्टॉक, बड़े पैमाने पर कोयला जलने की आशंका

कोरबा 05 जून। कोरबा जिले के एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र की 29 नंबर कोयला स्टॉक यार्ड में गुरुवार को भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कोयले के विशाल ढेर से उठती लपटें और काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देता रहा। घटना से लाखों टन कोयले के नुकसान और करोड़ों रुपये के राजस्व प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार एसईसीएल प्रबंधन द्वारा मानसून से पहले बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण किया जा रहा था। इसी क्रम में 29 नंबर स्टॉक यार्ड में लाखों टन कोयला डंप किया गया था। बुधवार दोपहर अचानक कोयले के ढेर से धुआं निकलना शुरू हुआ, जो कुछ ही समय में भीषण आग में बदल गया। शुरुआती तौर पर भीषण गर्मी और कोयले में मौजूद मीथेन गैस को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। खदान क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ने के कारण कोयले के स्टॉक में स्वतः दहन (स्पॉन्टेनियस कंबशन) की घटनाएं बढ़ रही हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से खदान क्षेत्र में लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगभग हर दूसरे दिन किसी न किसी कोयला स्टॉक में धुआं या आग की स्थिति बन रही है।
आग लगने की सूचना मिलते ही एसईसीएल के दमकल वाहन और पानी के टैंकर मौके पर पहुंच गए। कर्मचारियों और अधिकारियों ने आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास शुरू किए, लेकिन कई घंटों की मशक्कत के बाद भी आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी। मौके पर संबंधित विभाग के अधिकारी और तकनीकी अमला मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। आग को फैलने से रोकने के लिए आसपास के स्टॉक क्षेत्रों में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। हर दूसरे दिन किसी न किसी कोयला स्टॉक में धुआं या आग की स्थिति बन रही है। बताया जा रहा है कि आग की चपेट में आने से कोयले का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया है। मानसून से पहले तैयार किया गया यह स्टॉक उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण था। ऐसे में आग से कोयला डिस्पैच और उत्पादन गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं ने एसईसीएल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में कोल स्टॉक की नियमित मॉनिटरिंग, तापमान नियंत्रण और पानी के छिड़काव जैसे सुरक्षा उपाय पर्याप्त रूप से नहीं किए जा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
