व्यवहारिक जीवन में शामिल करें संस्कृत कोः डॉ. दिव्या

कोरबा 04 जून। सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सीतामणी में संस्कृत भारती छग की ओर से संस्कृत प्रबोधन वर्ग का आयोजन आज से शुरू हो गया। प्रबोधन वर्ग में विभिन्न जिलों से शिक्षार्थी शामिल हुए। यह अभ्यास वर्ग 10 दिन तक चलेगा।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर भारत माता का पूजन किया गया और फिर अतिथि सत्कार संपन्न हुआ। स्वागत गीत के माध्यम से संस्कृत के महत्व को रेखाकिंत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक तिवारी ने संवाद, संवेदना और संभाषण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हम इस अभ्यास वर्ग से बहुत कुछ सीखेंगे और इसके साथ जियेंगे बहुत सारे काम करेंगे। भाषा विज्ञान के साथ-साथ नासा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अपने क्षेत्र में संस्कृत को महत्वपूर्ण बताया है।
मुख्य वक्ता संस्कृत महाविद्यालय रायपुर की प्राध्यापिका डॉक्टर दिव्या देशपाण्डे ने संवाद की शैली में अपनी बात रखी। संस्कृत के प्रति अभिरूचि और इसे जानने की इच्छा को लेकर उन्होंने व्यवहारिक कार्य और अन्य विषयों में संस्कृत को शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती है लेकिन सभी भाषाओं की जननी संस्कृत है। स्वामी विवेकानंद विदेश यात्रा और उसमें दिये गए संदेश को लेकर भी उन्होने कहा कि भारतीय संस्कृति का डंका अंतरराष्टीय स्तर पर स्थापित है। संस्कृत भारती छग प्रबोधन वर्ग के सर्व वर्गअधिकारी के रूप में होमेश्वर चंद्राकर, हेमेंत साहू संगठन मंत्री, संयोजक मनोज वैष्णव, शिक्षिक नरसिंह शास्त्री, आर सी साहू, प्राचार्य विद्यानंद पाण्डेय, चैंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष योगेश जैन, उमेंद्र राम, नागेन्द्र सिंह, संदीप श्रीवास्तव, अशोक पाल, के के सोनी उपस्थित थे।
