उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों मिल रहा तकनीकी मार्गदर्शन

कोरबा 01 जून। जिले में उद्यानिकी (बागवानी) फसलों की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ-साथ अब बड़ी संख्या में किसान बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले में सैकड़ों किसान सब्जी एवं अन्य उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर बेहतर लाभ अर्जित कर रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि अंतर्वर्ती एवं विविध फसलों की खेती के परिणाम पहले भी उत्साहजनक रहे हैं और वर्तमान में भी किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। उनका कहना है कि लगातार एक ही प्रकार की फसल लेने से उत्पादन लागत बढने, मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने तथा मौसम संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत उद्यानिकी फसलों से किसानों को कम समय में बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है। अधिकारियों के अनुसार कोरबा जिले में उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए अनुकूल जलवायु और पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध है। किसानों के अनुभव भी इस दिशा में सकारात्मक रहे हैं। पहले जहां अधिकांश किसान धान और अन्य पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, वहीं अब कई किसान नई तकनीकों और विभागीय मार्गदर्शन के साथ बागवानी खेती को अपना रहे हैं। अन्य जिलों में सफल हुए प्रयोगों से प्रेरणा लेकर कोरबा के किसानों ने भी इस क्षेत्र में कदम बढ़ाया है। वर्तमान समय में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में टमाटर, बैंगन, खीरा, ककड़ी तथा अन्य सब्जी फसलें बड़े पैमाने पर तैयार हो रही हैं। इन फसलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके लिए स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों में आसानी से बाजार उपलब्ध हो जाता है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे परिवहन खर्च भी कम होता है। यही कारण है कि इन फसलों को नगदी फसलों की श्रेणी में भी रखा जाता है, क्योंकि उपज बिकते ही किसानों को शीघ्र भुगतान प्राप्त हो जाता है और नकदी प्रवाह बना रहता है।

उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बीज, सिंचाई उपकरण, कृषि यंत्र तथा अन्य आवश्यक संसाधनों पर अनुदान (सब्सिडी) उपलब्ध कराई जा रही है। इन सुविधाओं से किसानों का निवेश कम हो रहा है और वे आधुनिक खेती की ओर अधिक उत्साहित हो रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को भी अपनाएं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यही कारण है कि जिले में बागवानी खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह किसानों की समृद्धि का नया आधार बनती जा रही है।

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