40 गांव के विकास की योजना में योगदान दे रहा गोमुखी सेवा धाम

समग्र ग्रामीण विकास के मामले में बना उदाहरण

कोरबा 26 मई। बुनियादी सुविधाओं से अलग थलग दुर्गम संरचना वाला क्षेत्र देवपहरी और आसपास के 40 गांव के विकास की योजना को ध्यान में रखकर गोमुखी सेवा धाम काम कर रहा है। अनेक लोगों के अधक परिश्रम और निरंतर सहयोग से यह प्रकल्प समग्र ग्रामीण विकास के मामले में उदाहरण बन गया है।

नानाजी देशमुख की प्रेरणा चित्रकूट में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान की स्थापना करने वाले नानाजी देशमुख की इच्छा शक्ति हमारे लिए प्रेरणा स्रोत बनी। 5 सितंबर 2000 को गोमुखी सेवा धाम की स्थापना की गई। ग्रामीण क्षेत्र के वनवासियों के लिए कुछ अच्छा करने और उस क्षेत्र का भाग्योदय करने के विचार को क्रियान्वित करने के लिए सेवाभावी सर्वश्री बनवारी लाल अग्रवाल, किशोर बुटोलिया, डॉ ध्रुव बनर्जी, पीएन शर्मा, श्रीमती इंदु शर्मा, डॉ झरना बनर्जी सहित अन्य आगे आए।

गोमुखी सेवा धाम ने आश्रम, कार्यकर्ता निवास व विद्यालय की सुविधा के लिए 25 किलोबाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना प्रारंभ की। पर्याप्त बिजली की आपूर्ति के लिए कुछ दानदाताओं के सहयोग से 5 किलोवाट का सोलर प्लांट परिसर में स्थापित किया गया है। इससे बड़ा क्षेत्र रोशन हो रहा है।

आध्यात्मिक विकासः देवपहरी में एक अच्छे अवधारणा के साथ शुरू इस प्रकल्प में क्षेत्र में लोगों के आध्यात्मिक विकास पर भी काम किया। समाज और राष्ट्रहित के विषय में लोगों से संबाद की निरंतरता, धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति निष्ठा और आध्यात्मिक शक्ति की उपयोगिता को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। सिद्धीदात्री मंदिर लोगों की साधना का एक बड़ा केंद्र बन गया है जहां पर लोगों की उपस्थिति नियमित रूप से हो रही है। वर्ष के दोनों नवरात्र पर होने वाले कार्यक्रम लोगों को अपनी परंपरा से जोडने का माध्यम बने हुए। हिंगलाजगढ़ इस श्रृंखला में एक नया अध्याय बनकर सामने आए हैं जहां पर वर्तमान में देश के पांच शक्तिपीठों की अखंड ज्योत प्रज्वलित है।

Spread the word