भारत को चीन की चेतावनी: दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है

नईदिल्ली। चीन ने बौद्ध धर्म में सर्वोच्च स्थान रखने वाले दलाई लामा को लेकर भारत को चेतावनी दी है। भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है।

बता दें कि बीते साल जुलाई में दलाई लामा ने बयान जारी कर कहा था कि उनके पुनर्जन्म को पहचानने का एकमात्र अधिकार गादेन फोद्रांग के पास है। जवाब में चीन ने कहा था कि किसी भी पुनर्जन्म को बीजिंग की मंजूरी मिलनी चाहिए।

कैसे चुने जाते हैं दलाई लामा ?

तिब्बती परंपरा के अनुसार जब किसी वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु की मृत्यु होती है तो उनकी आत्मा फिर जन्म लेती है। मौजूदा 14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को हुआ था। उनकी पहचान भी पुनर्जन्म लेने वाली उस आत्मा के रूप में ही हुई थी। हालांकि मौजूदा दलाई लामा ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि उनका उत्तराधिकारी चीन के बाहर पैदा होगा। 2015 में बनी गादेन फोद्रांग फाउंडेशन के अधिकारियों के पास उत्तराधिकारी को खोजने व पहचानने का जिम्मा होगा। दलाई लामा के अंतिम संस्कार के समय उठने वाले धुएं का रुख, शरीर के झुकाव जैसे कई संकेतों से अनुमान लगाया जाता है कि पुनर्जन्म किस दिशा में हुआ है। वरिष्ठ भिक्षु तिब्बत की सबसे पवित्र झीलों में से एक ल्हामो ला-त्सो पर जाते हैं, जहां से पुनर्जन्म के स्थान का सुराग मिलता है।

चीन क्या कहता है?

चीन के अनुसार दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया चीनी कानून और ऐतिहासिक ‘गोल्डन अर्न’ की पद्धति के तहत होनी चाहिए। इस परंपरा में सोने के कलश में से संभावित नामों को निकाला जाता है। इसकी शुरुआत 1793 में किंग राजवंश के समय हुई थी। हालांकि तिब्बती को संदेह है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इस परंपरा का सहारा ले रहा है। बताते चलें कि चीन हमेशा से दलाई लामा को अलगाववादी करार देता आया है।

भारत की भी है भूमिका

तिब्बत की निर्वासित सरकार की राजधानी हिमाचल के धर्मशाला में है। 91 वर्षीय दलाई लामा भी यहीं रहते हैं। भारत में एक लाख से अधिक तिब्बती बौद्ध रहते हैं। चीन को डर है कि अगला दलाई लामा भारत की धरती से चुना जाता है तो तिब्बत की स्वतंत्रता का आंदोलन मजबूत होगा। भारत वैसे तो वन चाइना नीति का सम्मान करता है, लेकिन भारतीय अधिकारियों व केंद्रीय मंत्रियों ने कई बार स्पष्ट किया है कि अगले दलाई लामा को चुनने का अधिकार सिर्फ दलाई लामा और उनके अनुयायियों को है।

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