देश में इंटरनेट आधारित मुफ्त के एंटरटेनमेंट पर लगाम लगाने की तैयारी, शुल्क होगा अधिरोपित

नई दिल्ली. देश में इंटरनेट आधारित 24 गुणा 7 के मुफ्त के एंटरटेनमेंट पर लगाम लगाने की तैयारी हो गई है। इसके तहत यूट्यूब चैनल्स पर फ्री की लाइव स्ट्रीमिंग बंद होगी। इसके साथ ही इंटरनेट आधारित एप और चैनल्स पर भी मुफ्त का मनोरंजन बंद हो जाएगा। केंद्र सरकार इस पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नेशनल कमीशन बनाया जाएगा, जो फ्री स्ट्रीमिंग वाले प्लेटफॉर्म्स का रजिस्ट्रेशन, मानीटरिंग और शुल्क के नियम तय करेगा। इस पर केंद्रीय संचार मंत्रालय और ट्राइ ने काम शुरू कर दिया है। खास बात है कि इसके दायरे में दो प्रकार के प्लेटफार्म फ्री एड सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी व एप्लीकेशन बेस्ड लीनर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन आएंगे। इसमें अधिकतर मुफ्त के चैनल, पोर्टल और एप आ जाते हैं। नई व्यवस्था के मुताबिक नेशनल कमीशन इस संबंध में सभी नियम तय करेगा। इस पर सुझाव भी लिए जा रहे हैं। देश में फिलहाल बिना रजिस्ट्रेशन सैकड़ों लाइव स्ट्रीमिंग चैनल चल रहे हैं।
रजिस्ट्रेशन; अभी इस प्रकार के यूट्यूब आधारित प्लेटफार्म के लिए रजिस्ट्रेशन सिस्टम नहीं है। नई व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य चल सकेगा कि कितने प्लेटफार्म हैं।
शुल्क व्यवस्था : रजिस्ट्रेशन से लेकर संचालन तक न्यूनतम शुल्क रहेगा। अभी मकसद सभी को रजिस्टर्ड कर एक अम्ब्रेला के नीचे लाना हैं।
कंटेंट मानीटरिंग : रजिस्ट्रेशन व के बाद इन फ्री चैनल्स के कंटेंट की मानीटरिंग हो सकेगी। अभी इनकी मानीटरिंग नहीं हो पाती। शिकायत आने पर ही कदम उठते हैं।
जुर्माना-प्रतिबंध : रजिस्ट्रेशन पर जुर्माने व प्रतिबंध के प्रावधान होंगे। इसमें अलग-अलग श्रेणियों में जुर्माने व कार्रवाई के नियम रहेंगे।
राजस्व : लोकप्रिय होने से चैनल निर्माता, सर्विस प्रोवाइडर व स्पेस प्रोवाइडर को एड से कमाई होती है।लेकिन सरकार कोर राजस्व मिलता। सिस्टम में सरकार को राजस्व मिल सकेगा।
ये आएंगे दायरे में
फ्री एड सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी : यूट्यूब पर लाइव सेक्शन में आने वाले सभी चैनल दायरे में आएंगे। यह 24 घंटे चलते हैं। इसमें मुख्यतः लाइव स्ट्रीमिंग आएगी। यह इंटरनेट से चलते हैं व दर्शकों को एड दिखाने के बदले फ्री उपलब्ध रहते हैं। इसमें फिल्म, फूड, न्यूज, लाइव स्ट्रीमिंग सहित हर सेक्टर के चैनल हैं।
एप्लीकेशन बेस्ड लीनर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशनः इसमें मोबाइल व टीवी पर चलने वाले इंटरनेट आधारित वेब पोर्टल चैनल व एप आ जाते हैं। इसमें जियो टीवी, जी-5 जैसे चैनल्स भी आते हैं। वही पिकासो जैसे एप आधारित चैनल या इंटरटेनमेंट बेस्ड चैनल भी दायरे में रहेंगे। ये सब भी सातों दिन 24 घंटे इंटरनेट के जरिए चलते हैं।
