कही-सुनी (03 MAY-26) : रवि भोई

छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन में बदलाव की हलचल

चर्चा है कि 10 मई के बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन में व्यापक बदलाव हो सकता है। राजनीतिक हलकों में सुगबुगाहट है कि राज्य के एक उप मुख्यमंत्री को संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी दी जाएगी। बदले में एक महिला विधायक को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी दी जाएगी। उप मुख्यमंत्री के लिए लता उसेंडी, रेणुका सिंह समेत कई नाम राजनीतिक गलियारों में चलने भी लगे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व एक महिला को उप मुख्यमंत्री बनाकर एक तीर से कई निशाना साधने की फिराक में है। हल्ला है कि विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल के कम से कम चार-पांच मंत्रियों की छुट्टी होने वाली है, उनके बदले नए चेहरे लिए जाएंगे। पुराने विधायकों को मौका मिलने की गुंजाइश कम ही सुनाई पड़ रही है। एक विधायक को नितिन नबीन की टीम में सचिव बनाए जाने की बात चल रही है। राज्य में संगठन स्तर पर भी बड़े बदलाव की हवा है। संगठन में भी कई चेहरे इधर से उधर होने की चर्चा गर्म है। कहा जा कि छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन को लेकर सर्वे हो चुका है और उसी के आधार पर आपरेशन की बात चल रही है। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों का चुनावी नतीजा चार मई को आ जाएगा। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के साथ नितिन नबीन की टीम के गठन की खबर है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भी निशाने पर है।

क्या सतीश थोरानी विकल्प हैं श्रीचंद के
छत्तीसगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष सतीश थोरानी ने पिछले दिनों बीजेपी की सदस्यता ली। सतीश थोरानी के बीजेपी प्रवेश को श्रीचंद सुंदरानी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। व्यापारियों की राजनीति करते श्रीचंद सुंदरानी ने दलगत राजनीति में कदम रखा और एक बार रायपुर उत्तर से विधायक रहे। छत्तीसगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री प्रदेश की बड़ी व्यापारिक संस्था है। चैंबर के चुनाव में बड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है, पर सतीश थोरानी निर्विरोध चुने गए। सतीश थोरानी को रायपुर शहर जिलाध्यक्ष रमेश ठाकुर ने सदस्यता दिलाई है, ऐसे में वे बीजेपी के भीतर कितना दम मार सकते हैं, यह समय बताएगा? 2023 के विधानसभा चुनाव में उत्कल समाज के पुरंदर मिश्रा रायपुर उत्तर से टिकट लेने में कामयाब हो गए, पर श्रीचंद रायपुर उत्तर से दो बार लड़े। प्रदेश में सिंधी समाज बीजेपी का बड़ा वोट बैंक है और टिकट का बड़ा दावेदार भी। बृजमोहन अग्रवाल के सांसद बनने के बाद अब रायपुर दक्षिण सीट भी किसी नेता के लिए ईयर मार्क नहीं रह गया है। 2028 के विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण बड़ा मायने रखने वाला है। कहा जा रहा है कि सतीश थोरानी के दलगत राजनीति में कूदने से श्रीचंद सुंदरानी अब व्यापारी और सिंधी समुदाय के क्षत्रप नहीं रह गए हैं। वैसे श्रीचंद ने पिछले दिनों अपना जन्मदिन बड़े जोर-शोर से मनाया। चैंबर की राजनीति करते दलीय राजनीति में प्रवेश का यह नया मामला नहीं है। चैंबर अध्यक्ष रहते महवीर अग्रवाल भी जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।

अजय चंद्राकर के भाई के घर ईडी छापे के मायने क्या
भाजपा नेता और कुरुद के भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के निवास पर पिछले दिनों ईडी ने भारतमाला मुआवजा घोटाला में छापा मारा। आरोप है कि नियम विरुद्ध तरीके से अपने करीबियों को अभनपुर, दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव और मगरलोड क्षेत्रों में जमीन का गलत मुआवजा दिलवाया है। ईडी के लपेटे में और भी लोग हैं,पर अजय चंद्राकर के चचेरे भाई के निवास पर ईडी के दाखिल होने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। अजय चंद्राकर साय सरकार के राज में विधानसभा में आक्रामक दिखते हैं और कई मंत्री उनके निशाने पर होते हैं। कई मौकों पर तो सरकार घिरती भी नजर आती है। डॉ रमन सिंह के राज में 10 साल मंत्री रहे अजय चंद्राकर कुर्मी समाज से आते है। भाजपा नेतृत्व ने अजय की वरिष्ठता और अनुभव को दरकिनार कर उस समाज से टंकराम वर्मा को साय सरकार में मंत्री बना दिया। चचेरे भाई पर कार्रवाई को अजय चंद्राकर के लिए इशारों-इशारों में संकेत माना जा रहा है। भारतमाला मुआवजा घोटाला में अब तक अफसरों-कर्मचारियों और दलालों पर ही कार्रवाई हुई है। नेताओं पर अबतक हाथ नहीं डाला गया है, जबकि भारतमाला प्रोजेक्ट में कई नेताओं के मालामाल होने की ख़बरें उड़ती रहती हैं।

ईरान युद्ध के चलते कुछ नेता-अफसरों की उड़ी नींद
कहते हैं कि ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध के कारण छत्तीसगढ़ के कुछ नेता और अफसरों की नींद उड़ गई है। चर्चा है कि राज्य के कुछ नेता और अफसरों ने दुबई में इन्वेस्ट कर रखा है। ईरान द्वारा दुबई को भी निशाने पर ले लिए जाने के कारण वहां की अर्थव्यवस्था इन दिनों धराशायी हो गई है। बताते हैं ऐसे में यहाँ के नेताओं और आईएएस अफसरों को काफी नुकसान हो गया है। खबर है कि दुबई में पूंजी लगाने वालों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के नेता शामिल हैं, वहीं अफसरों में रिटायर्ड और सेवारत दोनों हैं। कहते हैं दुबई में कुछ कारोबारियों ने भी पैसा लगा रखा है। कांग्रेस राज में चर्चित कुछ लोगों के दुबई में होटल और अन्य धंधे की हवा उड़ी हुई है। बड़े लोगों का बड़ा इन्वेस्टमेंट हैं, तो नुकसान भी वैसा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस कारण नींद उड़ना स्वाभविक ही है।

चर्चा में राईस मिलरों की लेवी
जब से छत्तीसगढ़ राज बन है, तब से राईस मिलरों की लेवी चर्चा में है। समय और परिस्थिति के अनुसार इसमें बदलाव की खबरें आती रहती है। छत्तीसगढ़ धान पैदावार वाला राज्य है और राईस मिल राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार है। कहते है लेवी के बाद राईस मिलरों का बकाया पैसा सरकार के खजाने से उनके खाते में ट्रांसफर होता है। बताते है पहले राईस मिलर ही इकट्ठा कर चढ़ावा चढ़ा देते थे, पर ईडी-सीबीआई की तिरछी नजर से उन्होंने हाथ झटक लिया है और यह काम जिले के अफसरों के सुपुर्द हो गया है। कहते हैं पहले 10 रुपए क्विंटल था अब दुगुना हो गया और हिस्सेदार भी बढ़ गए है। इसी छत्तीसगढ़ राज्य में चर्चित नान घोटाला हो चुका है, जिसमें कुछ अफसरों को जेल की हवा खानी पड़ी तो कुछ राजनेता बदनाम हुए। अब साय के राज में कोई नान घोटाला न हो, इसकी दुआ लोग कर रहे हैं। वैसे बीजेपी की सरकार भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टालरेंस की बात करती है।

सरकार कब बनाएगी डीजीपी ?
स्थायी डीजीपी के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस देकर अब तक स्थायी डीजीपी नियुक्त न किए जाने के बारे में सवाल-जवाब किया है। छत्तीसगढ़ में स्थायी डीजीपी नियुक्ति के मामले में 16 अप्रैल को पेशी थी। अब 19 मई 2026 को पेशी है। तो सवाल उठ रहा है कि क्या 19 मई से पहले सरकार यूपीएससी द्वारा भेजे गए पैनल में से किसी को डीजीपी नियुक्त कर सुप्रीम कोर्ट में जिरह से बचेगी या फिर कोई और तर्क रखेगी ? राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब देने के लिए डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के अफसर को ऑफिसर इन चार्ज नियुक्त कर दिया है। बताते हैं राज्य के डीजीपी नियुक्ति का मामला शीर्ष स्तर पर पिछले महीने से पेंडिंग है। अरुणदेव गौतम फरवरी 2025 से प्रभारी डीजीपी के तौर पर कार्यरत है। यूपीएससी ने स्थायी डीजीपी के लिए मई 2025 में आईपीएस का पैनल भेज दिया था, पर पैनल के आधार पर किसी अफसर को डीजीपी बनाने के की जगह मामला पेंडिग चल रहा। अब सुप्रीम कोर्ट छत्तीसगढ़ सरकार से पूछ रहा है कि मई 2025 में यूपीएससी ने डीजीपी के लिए पैनल भेज दिया तो अब भी राज्य में प्रभारी डीजीपी क्यों ? अब देखते हैं सरकार क्या निर्णय करती है।

लोगों को डराने लगा लिफ्ट
राजधानी में कई शॉपिंग माल और बहुमंजिला काम्प्लेक्स हैं, पर आजकल बहुमंजिला काम्प्लेक्स का लिफ्ट लोगों को डराने लगा है। पता नहीं लिफ्ट चलते-चलते कब बंद हो जाए और कौन फंस जाए। पिछले महीने एक बड़े कम्प्लेक्स में जिम में जाते-जाते एक महिला आईएएस फंस गई। दो दिन पहले एक आईएएस की पत्नी के लिफ्ट में फंसने की खबर आई। बताते हैं वह भी जिम जा रही थी। सबसे मजेदार बात है कि सभी काम्प्लेक्स में जिम टॉप फ्लोर में बनाया गया है और सुबह-शाम उसके नीचे फ्लोर में लोग दिल थामे काम करते रहते हैं। शॉपिंग माल और शॉपिंग काम्प्लेक्स के मालिक ग्राहकों से मनमर्जी वाहन पार्किग शुल्क लेते हैं। अपने किरायेदारों से मोटा मेंटेनेंस फ़ीस लेते हैं, फिर भी लिफ्ट क्यों फंसते हैं। शॉपिंग माल और शॉपिंग काम्प्लेक्स के आगे राजधानी का प्रशासन नतमस्तक क्यों है। क्या इसके पीछे कोई राज तो नहीं छुपा है। अब आईएएस और उनका परिवार चपेट में आया तो शायद व्यवस्था सुधरे।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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