बालको से जुड़े मुद्दों पर विवादः सड़क कब्जा, टैक्स बकाया और पर्यावरण पर उठे सवाल

कोरबा 01 मई। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक केंद्र कोरबा में एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको ) से जुड़े कई गंभीर मुद्दे एक साथ सामने आने के बाद अब मामला चर्चा के केंद्र में है। सड़क कब्जा, नगर निगम का कथित 100 करोड़ से अधिक टैक्स बकाया, वनभूमि उपयोग, पेड़ों की कटाई, बिना अनुमति निर्माण और सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल जैसे आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उठते रहे इन मुद्दों को अब “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” द्वारा प्रमुखता से उठाया गया है, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। लोगों का कहना है कि पहले भी शिकायतें हुईं, कुछ मामलों की पुष्टि भी हुई, लेकिन कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो सकी।
सड़क कब्जा और डायवर्जन का आरोप
अमरनाथ होटल से परसाभाटा तक जाने वाले मार्ग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि इस सार्वजनिक सड़क को डायवर्ट कर संयंत्र के उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे आम लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा है। मांग की जा रही है कि सड़क की जांच कर उसे मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
100 करोड़ से ज्यादा टैक्स बकाया का दावा
नगर निगम कोरबा का 100 करोड़ रुपए से अधिक कर बकाया होने का दावा भी चर्चा में है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि यह सही पाया जाता है तो यह बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है। सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि की वसूली को लेकर अब तक क्या कार्रवाई हुई।
वनभूमि और पेड़ों की कटाई पर सवाल
वनभूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर नियमों के विरुद्ध गतिविधियां हुई हैं। इस संबंध में वन विभाग द्वारा पत्राचार किए जाने की भी चर्चा है। वहीं, जहां पौधरोपण होना था, वहां राखड़ डैम निर्माण के आरोप भी सामने आए हैं।
बिना अनुमति निर्माण और बाउंड्री वॉल विवाद
स्थानीय लोगों ने बिना अनुमति निर्माण और बाउंड्री वॉल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यदि बिना स्वीकृति निर्माण हुआ है, तो यह नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है और इसकी जांच जरूरी मानी जा रही है।
मितान भवन और इको थिएटर पर भी घिरे सवाल
मितान भवन के आसपास सड़क निर्माण और अन्य संरचनाओं को लेकर भी विवाद सामने आया है। वहीं, इको थिएटर निर्माण में पेड़ों की कटाई और भूमि उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
पर्यावरणीय चिंताः राखड़ डैम पर निगाह
राखड़ डैम और उससे जुड़े निर्माण को लेकर भी पर्यावरणीय चिंताएं गहराई हैं। यह मामला जल स्रोतों और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है।
क्या यह एक पैटर्न?
इन सभी मुद्दों को एक साथ देखने पर यह आशंका जताई जा रही है कि मामला सिर्फ अलग-अलग घटनाओं का नहीं, बल्कि एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन से बढ़ी उम्मीद
मामले में कलेक्टर कुणाल दुदावत और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के सख्त रुख की चर्चा है। लोगों को उम्मीद है कि इस बार संयुक्त जांच कर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
