दिन-ब-दिन जोखिम भरा होता जा रहा है छत्तीसगढ़ का औद्योगिक वातावरण, लगातार हो रहे हादसे; बेमौत मर रहे मेहनतकश मजदूर

रायपुर। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक वातावरण दिन-ब-दिन जोखिम भरा होता जा रहा है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों की अनदेखी या मिलीभगत के चलते प्रदेश भर के उद्योगों में कार्य के दौरान सुरक्षा के मामलों में गंभीर लापरवाही बरतना आम बात हो गई है। यही वजह है कि पूरे प्रदेश के उद्योगों में लगातार हादसे हो रहे हैं और मेहनतकशों को जान गंवानी पड़ी रही है।

छत्तीसगढ़ के सक्ति में सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को हुए बॉयलर विस्फोट में मरने वालों की संख्या को लेकर गहमा-गहमी तेज़ है| मौका-ए-वारदात से 13 मृतकों के शव बरामद कर लिए गए है| लेकिन,अभी भी कई पीड़ित परिवार अपनों की ख़ोजबीन में आंसू बहा रहे है| बॉयलर ब्लास्ट के बाद कई ऐसे श्रमिक है,जो लापता बताए जाते है|

जानकारी के मुताबिक,विस्फोट के बाद  का मंजर काफी ख़ौफ़नाक था, धमाके की गूंज कई किलोमीटर तक सुनाई दी थी| वेदांता पावर प्लांट में बायलर फटने की घटना को क्या टाला जा सकता था ? ये हादसा है या इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एंड सेफ्टी में भारी चूक और लापरवाही ? प्रशासनिक तौर पर 20 मौतों की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा कर्मियों के झुलसने और इनमे से कई के गंभीर होने की जानकारी सामने आई है| दरअसल,इस घटना की अब एक नई और डरावनी मानवीय त्रासदी सामने आ रही है। कई पीड़ित परिवार आरोप लगा रहे है, कि घटना के दो दिन बाद भी उनके अपनों का कोई अता-पता नहीं चल पाया है| वे अभी भी लापता है ? उनके मुताबिक, मृतकों और घायलों की सूची में भी ऐसे कर्मियों का नाम नदारद है| जबकि वे रोजाना की तरह मंगलवार को भी अपनी  ड्यूटी पर उपस्थित थे| लापता कर्मियों की खोजबीन में जुटे ऐसे दर्जनों पीड़ित परिवार फैक्ट्री परिसर, गेट और अस्पतालों के चक्कर काटते देखे गए|

उधर, प्रशासन ने मृतकों के पोस्टमार्टम और पीड़ित परिवारों को शव सौंपने की कवायत शुरू कर दी है| तस्दीक की जाती है,कि कई शव ऐसे है,जो पूरी तरह से झुलस चुके है|उनकी शिनाख्ती के लिए अब DNA टेस्ट भी कराया जा रहा है|राज्य सरकार ने हादसे पर दुःख जताते हुए मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे का एलान किया है| बताया जाता है,कि मृतकों के लिए 35 लाख और घायलों को 15 लाख की राहत राशि स्वीकृत की गई है| प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की जाँच के निर्देश दिए गए है, 30 दिन के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपने का फरमान जारी किया गया है| 

PM नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए बॉयलर विस्फोट हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्घटना बेहद दुखद है और स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की हर संभव मदद कर रहा है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।वहीं, द्रौपदी मुर्मू ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सक्ती जिले के विद्युत संयंत्र में हुई इस दुखद घटना से उन्हें अत्यंत पीड़ा हुई है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में लिखा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति उनकी हार्दिक संवेदनाएं हैं और वे घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हैं।

छत्तीसगढ़ में वेदांता पावर प्लांट में ब्लास्ट की घटना सामने आने के कुछ दिन पूर्व ही भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के पावर प्लांट-2 (PBS-2) में टर्बाइन सेक्शन में 7 अप्रैल 2026 की दरम्यानी रात भीषण आग और धमाका हुआ था। हालांकि,इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ| लेकिन कई कर्मचारी बुरी तरह से घायल हुए थे| सूत्रों के मुताबिक,प्रारंभिक तौर पर विस्फोट और आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया। जबकि घटना की जाँच में यह तथ्य भी सामने आया,कि मौके पर तैनात दमकल कर्मी का कान खराब था,उसे किसी बीमारी के चलते संक्रमण का सामना करना पड़ रहा था| यह भी बताया जाता है,कि अग्नि शमन विभाग के कर्मचारी भागचंद मीणा के कान खराब होने कानों में सीटी बजने के कारण उसे फायर अलार्म ही नहीं सुनाई दिया था| नतीजतन,इतनी बड़ी घटना सामने आई थी|

जानकारी के मुताबिक, मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) ने हादसे के बाद ड्यूटी में तैनात उक्त कर्मी के इंज्यूरी फॉर्म भरवाने की कवायत शुरू की थी| भिलाई स्टील प्लांट हो या फिर सक्ति जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में सामने आई घटना,प्रदेश में इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एंड सेफ्टी महकमे की नाकामी के रूप में देखी जा रही है,इन औद्योगिक ईकाइयों के अलावा छोटे बड़े औद्योगिक इलाकों में दर्जनों ऐसी बड़ी घटनाएं-दुर्घटनाएं सामने आई है| जानकारों के मुताबिक,बीते दो वर्षों में प्रदेश के महत्त्वपूर्ण औद्योगिक इलाको में ऐसी घटनाओं में आई तेज़ी का कारण इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एंड सेफ्टी के प्रावधानों को लागू करने में बरती जा रही कोताही को दर्ज किया गया है | सूत्र तस्दीक करते है,कि इस दिशा में सक्रिय केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियां सिर्फ कागज़ी घोडा दौड़ाने में ही दिलचस्पी लेती है, ना की कानून का पालन सुनिश्चित करवाने में| उसकी कार्यप्रणाली सिर्फ औपचारिक बन कर रह गई है| नतीजतन, प्रदेश का औद्योगिक वातावरण जोखिम भरा हो चला है|

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