कोरबा में फोटो विवाद पर सियासत गरमाई, अफसरों को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत की कड़ी प्रतिक्रिया

रायपुर 16 जुलाई। छत्तीसगढ़ के कोरबा में राज्यपाल रमेन डेका के दौरे के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर की उनसे मुलाकात की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “ना मैं कलेक्टर का कर्मचारी हूं और न ही मातहत अधिकारी। मुझे ऐसे निर्देश देने का अधिकार है।”

विधानसभा परिसर में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत भी इस पूरे प्रकरण में सामने आए और कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ननकीराम कंवर की फोटो वायरल होने पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने जो कहा, उसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, “कलेक्टर को अपना नोटिस वापस लेना चाहिए। अफसर अपनी सीमा से बाहर जाकर कार्य न करें।”

गौरतलब है कि राज्यपाल के कोरबा प्रवास के दौरान एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसे लेकर प्रशासन की ओर से आपत्ति जताते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद सियासी गलियारों में इस मुद्दे को लेकर घमासान शुरू हो गया है।

फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की तरफ से कोई औपचारिक सफाई सामने नहीं आई है। वहीं भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं में बयानबाजी का दौर जारी है। पूर्व मंत्री को जारी नोटिस में जरूर कलेक्टर अजित वसन्त ने कहा है कि पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर को पूरा सम्मान दिया गया था।

निर्मल सिंह राज ने भी मामले को गंभीर बताया, कहा- राज्यपाल के कोरबा दौरे में पूर्व मंत्री व वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर के साथ दुर्व्यवहार प्रोटोकॉल व्यवस्था की खुली पोल

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के दो दिवसीय कोरबा प्रवास के दौरान एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय घटना सामने आई, जिसने न केवल छत्तीसगढ़ की राजनीतिक मर्यादा को चोट पहुंचाई, बल्कि प्रोटोकॉल व्यवस्था की पोल भी खोल दी।

अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस कोरबा निर्मल सिंह राज ने एक वरिष्ठ आदिवासी नेता का प्रशासनिक तौर पर हुए अपमान को गंभीरता से लेते हुए विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि भाजपा के वरिष्ठतम आदिवासी नेता, अविभाजित मध्यप्रदेश एवं पृथक छत्तीसगढ़ में मंत्री रह चुके ननकीराम कंवर जब क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं को लेकर राज्यपाल से मिलने पहुंचे और एक ज्ञापन सौंपा, तब उन्हें बैठने तक की अनुमति नहीं दी गई। यह घटना उस समय और भी अधिक शर्मनाक हो जाती है जब प्रोटोकॉल की अवमानना करते हुए प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के चलते भाजपा की ही सरकार में, भाजपा के ही वरिष्ठ नेता के साथ होता है।

उन्होंने कहा है कि ननकीराम कंवर न केवल भाजपा के आधार स्तंभों में से एक हैं, बल्कि उन्होंने जीवनभर आदिवासी समाज की बेहतरी और भाजपा की विचारधारा के लिए कार्य किया है। आज जब उसी पार्टी की सरकार में उन्हें नजर अंदाज किया जाता है, तो यह भाजपा की कथनी और करनी के बीच गहरे अंतर को उजागर करता है। फोटो को देखने पर साफ पता चलता है कि राज्यपाल के साथ कोरबा जिला प्रशासन प्रमुख भी बैठे हैं, जो न तो स्वयं ननकीराम के सम्मान में खड़े होते हैं और न ही उनको बैठने के लिए बोलते हैं। ऐसे समय में प्रोटोकॉल क्या होना चाहिए, यह तो कोरबा जिला प्रशासन प्रमुख को भलीभांति पता होगा। इसमें संदेह नहीं, लेकिन उन्होंने इसकी कोई परवाह नहीं की।

निर्मल राज ने उक्त घटना पर दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि यह घटना इस सवाल को जन्म देती है कि क्या यही है प्रदेश भाजपा सरकार का आदिवासी सम्मान मॉडल? आखिर वह कौन-सी भाजपा है, जो अपने संघर्षशील नेताओं तक को नजर अंदाज कर रही है? क्या यह उदाहरण यह नहीं दर्शाता कि भाजपा की प्राथमिकता में आदिवासी समाज केवल एक वोट बैंक बनकर रह गया है? यह अपमान न केवल एक नेता का है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की अवहेलना है। जनता और आदिवासी समुदाय इस प्रकार की घटनाओं को न भूलेगा, न माफ करेगा।

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