आवागमन व्यवस्था बेहतर रखने की चुनौती, ट्रैफिक पुलिस की बढ़ी जिम्मेदारी

कोरबा। कोरबा शहर में वाहनों के बढ़ते दबाव और दूसरे कारणों से विभिन्न क्षेत्रों में आए दिन लग रहे जाम के कारण जनता को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं। भीषण गर्मी के खतरे और डर को दूर करते हुए इस दिशा में पुलिस काम कर रही है।

अधिकारियों के मार्गदर्शन में व्यवस्था की बेहतरी के लिए ट्रैफिक टीम ने कमर कसी है। सडक़ हादसों की रोकथाम को लेकर नियम-कायदों के परिपालन और लोगों में ट्रैफिक रूल्स को लेकर समझदारी पैदा करने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। शहर के ट्रांसपोर्ट नगर, नहर पुल, सीएसईबी चौक और नेताजी सुभाषचंद्र बोस चौराहा के अतिरिक्त राताखार बाइपास प्रमुख क्षेत्र हैं जहां समस्याएं ज्यादा हैं। रिंगरोड बालकोनगर व शहर के प्रवेश द्वारा गौमाता चौराहा की तरफ होने वाली समस्याओं की रोकथाम को लेकर ट्रैफिक पुलिस टीम को पूरी क्षमता के साथ ड्यूटी करनी पड़ रही है। बताया गया कि सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल करते हुए कर्मियों की तैनाती ऐसे प्वाइंट पर की गई है ताकि आवागमन प्रणाली पर गंभीरता से नजर रखी जा सके। कोरबा शहर में रेलवे फाटक भी अपने-आपमें एक समस्या हैं, जहां पर मालगाडिय़ों के अटकने के कारण जाम की स्थिति निर्मित होती है और लंबे समय तक लोग परेशान होते हैं। काफी समय से मौजूद समस्या का निराकरण उद्योग प्रबंधनों के द्वारा नहीं निकाला जा सका है और ऐसे में ट्रैफिक के मैदानी अमले को स्थिति सामान्य करने के लिए पसीना बहाना पड़ता है।

कोल डस्ट के अलावा वाहनों का धुंआ और गाडिय़ों के हॉर्न भी पूरे मसले को बढ़ाने का कारण बने हुए हैं। इन्हीं सबके बीच लोगों को आवागमन करना है और व्यस्त क्षेत्र में पुलिस को ड्यूटी। इन तमाम कारणों से जन स्वास्थ्य के खतरे पैदा हो रहे हैं। इस दौरान ड्यूटी करने का मतलब पूरी गंभीरता दिखाना है ताकि अपने-आपको फिट रखा जा सके। सतर्कता के बावजूद बहुत सारे पुलिस कर्मी प्रदूषण के चक्कर में श्वसन और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि नीतिगत रूप से कोई ऐसी व्यवस्था की जाए ताकि नियमित रूप से उनका स्वास्थ्य परीक्षण हो सके और यह पता चल सके कि वे शारीरिक रूप से कितने सुरक्षित हैं।

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