कोल स्टाकों की निगरानी अब होगी हाईटेकः थ्रीडी लेजर स्कैनर, न्यूक्लियर डेंसिटो मीटर और वैज्ञानिक फार्मूले से होगी जांच

कोरबा 06 मई। कोयला खदानों में कोल स्टॉक की जांच कंपनी का एक महत्वपूर्ण पहलू है। स्टॉक जांच में अब बदलाव की तैयारी है। आगामी दिनों में कोयले के स्टाक की जांच थ्रीडी लेजर स्कैनर, न्यूक्लियर डेंसिटो मीटर और वैज्ञानिक फार्मूले से होगी। बताया जा रहा है कि कोल इंडिया लिमिटेड अपनी अनुषंगी कंपनियों की खदानों में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाने के लिए यह बदलाव करने जा रही है।

कोल इंडिया बोर्ड ने सितंबर 2011 में न्यू येलो बुक को मंजूरी दी थी, जो पारंपरिक मापन पर आधारित थी। इसके बाद खनन क्षेत्र में आए तकनीकी बदलावों को देखते हुए दिसंबर 2018 में सीएमपीडीआई के निदेशक तकनीकी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति ने रांची और कोलकाता में कई दौर की बैठकों के बाद सिफारिशों को अंतिम रूप दिया।कोयला मंत्रालय के दिशा निर्देश पर कोल इंडिया की ओर से गठित कमेटी की ओर से नवंबर में दी गई रिपोर्ट के बाद इसी साल के अप्रैल से इसे लागू कर दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन, थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और एयरबोर्न लेजर स्कैनर से स्टाक की माप होगी। साफ्टवेयर से सीधे वाल्यूम की गणना होगी। कन्वर्जन फैक्टर हर तीन साल में प्रत्येक वर्ष एक मार्च तक तीन साल पुराने कन्वर्जन फैक्टर का पुनः निर्धारण होगा।

कोयला का ग्रेड बदलने या नया ढेर बनने पर पहले भी गणना होगी। इसके साथ ढीले स्टाक के लिए टीपरो से वजन-आयतन अनुपात लिया जाएगा। इसके लागू होने से परियोजना व पिट क्षेत्र में कोयला चोरी और स्टाक के गलत आकलन पर पूरी तरह लगाम लगेगी। कोयला ओवररिपोर्टिंग करने वाले अधिकारियों पर सख्त निगरानी होगी। बदलाव को ओवररिपोर्टिंग व कोयला चोरी के कारण कोयला कंपनियों के हो रहे नुकसान पर अब सख्ती की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में और भी बदलाव कोल इंडिया के कोयला उत्पादन स्थलों पर देखने को मिलेगा।

कॉल स्टॉक की जांच में कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए कई ठोस कदम उठाए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग होगी। तौल पर्चियों और फील्ड नोट पर समिति के सभी सदस्यों और वे ब्रिज प्रभारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। सभी माप मेजरमेंट बुक में दर्ज होंगे। मैन्युअल तरीके से मानवीय त्रुटि की संभावना रहती है। नई तकनीक से उत्पादन और स्टाक की निगरानी रीयल-टाइम और सटीक होगी।

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