ट्रंप ने भारत और चीन को ‘नरक का द्वार’ बताने वाली नस्लीय टिप्पणी को सोशल मीडिया पर साझा किया

वाशिंगटन. अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने प्रवासियों के खिलाफ अपने अभियान को अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने भारत और चीन को ‘नरक का द्वार’ बताने वाली एक अत्यंत विवादास्पद और नस्लीय टिप्पणी को सोशल मीडिया पर साझा किया है। रेडियो होस्ट माइकल सेवेज के एक पत्र को रीपोस्ट करते हुए ट्रंप ने ‘बर्थराइट सिटिजनशिप’ कानून को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ट्रंप का आरोप है कि भारत और चीन जैसे देशों के लोग इस कानून का फायदा उठाकर नौकरियों पर ‘कब्जा’ कर रहे हैं। सेवेज का दावा है कि ये प्रवासी यहां बच्चे को जन्म देते हैं और फिर ‘चेन माइग्रेशन’ के जरिए पूरे परिवार को बुला लेते हैं।
विवाद बढ़ने के बाद अब भारत में अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, ट्रंप ने भारत को एक ‘महान देश’ बताया है, जिसका नेतृत्व उनके बहुत अच्छे दोस्त के हाथों में है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयान को दर्ज तो किया पर टिप्पणी नहीं की है।
1.5% भारतीयों का अमरीकी राजस्व में 6% का योगदान
ट्रंप ने कहा सिर्फ अमरीका का कानून बर्थराइट सिटिजनशिप की गारंटी देता है। जबकि हकीकत में कनाडा, मेक्सिको सहित 36 देश यह अधिकार देते हैं। ट्रंप का यह दावा भी गलत है कि भारतीय नौकरियों पर ‘कब्जा’ कर रहे हैं। हकीकत में यह समुदाय अमरीका में बड़ा रोजगार प्रदाता वर्ग है। भारतीय-अमरीकी समुदाय अमरीका की कुल आबादी का मात्र 1.4% से 1.5% हिस्सा हैं, जबकि कर राजस्व में हिस्सेदारी 6% है।
-सेवेज के भारत-चीन पर मुख्य आरोप
भारत-चीन को ‘नरक का द्वार’ करार दिया।
प्रवासियों को ‘लैपटॉप वाले गैंगस्टर’ कहा।
बर्थराइट सिटिजनशिप कानून के दुरुपयोग का दावा।
संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ रहा।
अमरीकी सांस्कृतिक पहचान को खतरे की चेतावनी।
