बैसाख में रहें सावधानः भारी भोजन बढ़ा सकता है परेशानी

डॉ. नागेंद्र शर्मा ने दी उपयोगी सलाह
कोरबा 03 मार्च। बैसाख का महीना प्रारंभ हो गया है। यह अगले 30 दिन तक प्रभावशील रहेगा। तापमान की अधिकता के साथ इस दौर में संचारी रोगों की अधिकता की संभावना होगी। इसके अलावा कफ और पित्त दोष के असंतुलन का भी खतरा रहेगा। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर नागेंद्र नारायण शर्मा ने लोगों को इस दृष्टि से बैसाख के महीने में भारी भोजन सहित कई चीजों से परहेज करने की सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि बैसाख के शुरु होते ही मौसम में कई बदलाव सुनिश्चित है। बसंत से ग्रीष्म में मौसम के परिवर्तन से कफ और पित्त दोष के असंतुलित होने की संभावना है। इससे संक्रामक रोगों, अपच, उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्या हो सकती है। व्यापक जनहित में उन्होंने सलाह दी है कि लोगों को जीवनशैली को लेकर सतर्क रहना होगा। इस दौरान तैलीय, मसालेदार और भारी भोजन से परहेज करना चाहिए तथा बासी और होटल के भोजन से बचने के साथ वनस्पति तेल का सेवन दूरी बनाएं। बैसाख माह में बेल का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। उन्होंने बताया कि बैसाख माह में हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। आहार में जौ, सत्तू, दलिया, चावल, मूंग, चना, तुअर दाल, मौसमी फलों में बेल, तरबूज, खरबूजा, आम, संतरा, मौसंबी, सेव और नारियल लाभकारी हैं। सब्जियों में लौकी, ककड़ी, कद्दू, तोरई, करेला, सहजन की फली, पुदीना और चौलाई का सेवन करना चाहिए। मसालों में जीरा, धनिया, हल्दी, इलायची और दालचीनी उपयोगी माने गए हैं।
इन चीजों से त्यागे मोह
लोगों को बताया गया कि बैसाख में परेशानी से बचने के लिए वनस्पति तेल, बाजरा, उड़द, मसूर, मेथी, बैंगन, मूली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, अरबी और टमाटर से परहेज करें। साथ ही ज्यादा तेल-मसालेदार, भारी और बासी भोजन का सेवन कम से कम करें। इसके साथ ही सुबह जल्दी उठकर योग, प्राणायाम और हल्का व्यायाम जरूर करें। जबकि अधिक समय तक सोने और रात में बेमतलब जागरण के अलावा अत्याधिक श्रम करने से दिक्कत हो सकती है।
