देशभर में श्रमिक संगठनों ने चार नए श्रम संहिताओं के विरोध में मनाया विरोध दिवस

चार नये श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग
कोरबा । 26 नवंबर 2025 को देशभर में श्रमिकों द्वारा चार नए श्रम संहिताओं के विरोध में विरोध दिवस मनाया गया। छत्तीसगढ़ में भी श्रमिक संगठनों के संयुक्त आवाहन पर पूरे राज्य में कॉर्पोरेट पक्षिय और घोर मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग करते हुए, विरोध दिवस मनाया, उसी कड़ी में अल्युमिनियम एम्पलाइज यूनियन एटक की ओर से चार श्रम संहिताओं के विरोध में बालको कारखाना के मुख्य द्वार आजाद चौक पर बड़े धरना एवं आम सभा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता कामरेड एस.के. सिंह ने की, कार्यक्रम का संचालन यूनियन के महासचिव कामरेड सुनील सिंह के द्वारा किया गया, उन्होंने चार नये श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग करते हुए विरोध किया तथा साथ ही मजदूर विरोधी नीतियों पर बोलते हुए कहा कि कारखाना में हजारों की संख्या में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है।
धरना और आमसभा को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य एटक के प्रांतीय महासचिव कामरेड हरिनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार नये श्रम संहिताओं को बनाकर न केवल देश के मजदूरों को कारखानेदारों का गुलाम बना दिया, बल्कि मजदूरों को 18 वीं शदी में धकेल दिया है, उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न प्रचार माध्यमों से प्रचारित किया जा रहा है कि, श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और ओवरटाइम दुगने दर पर भुगतान होगा, सभी श्रमिकों को रोजगार पत्र मिलेगा, मातृत्वहित लाभ भी मिलेगा, यह सब कोई नई चीज नहीं है। मजदूर निर्णायक लड़ाई के पश्चात बहुत पहले ही उपरोक्त सुविधा प्राप्त कर चुके हैं।
कॉमरेड सिंह ने कहा चार श्रम सहिताएं घोर मजदूर विरोधी और कॉरपोरेट पक्षिय हैं,यह चारों श्रम संहिताएं रद्द किये जाएं। कॉमरेड सिंह ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी तय करने के मापदंड तय करनेके लिए श्रम कानून के अंतर्गत ड्राफ्ट नियम 2020 धारा 3(1) में न्यूनतम मजदूरी की दैनिक दर गणना का तरीका बताया गया है, जो निम्नप्रकार है
मानक श्रमिक परिवार जिसमें कमाने वाले कामगार के अलावा उसकी पत्नी दो बच्चे शामिल हैं जो तीन वयस्क उपभोक्ता इकाइयों के बराबर है।
प्रतिदिन प्रति उपभोक्ता इकाई हेतु नियत 2700 कैलोरी की खपत ।
प्रति मजदूर वर्ग परिवार के लिए 66 मीटर कपड़ा प्रतिवर्ष।
आवासीय किराया खर्च जो भोजन और कपड़े पर आनेवाले खर्च का 10%होगा।
ईंधन बिजली खर्चकी अन्य विविध मदें जो न्यूनतम मजदूरी की 20% होगी।
बच्चोंकी शिक्षा का खर्च चिकित्सा आवश्कता मनोरंजन और अन्य आकस्मिक खर्च जो न्यूनतम 25% होगा।
न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए धारा 3(1) प्रावधानों को 1957 में भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश पर आधारित कहना सही नहीं होगा। पिछले 65 वर्षों में जीवन के तौर तरीकों में भारी बदलाव आ चुका है, और 65 वर्ष पहले की गई सिफारिशों को कालातीत समझा जा सकता है। कामरेड सिंह ने आगे कहा कि श्रम कानून में इस तरह के बदलाव का मकसद है, ट्रेड यूनियनों और उनके मोल भाव (बारगेनिंग) करने की ताकत को कमजोर करना, जो मजदूरों को अभी विभिन्न श्रम कानून से प्राप्त लाभ/ अधिकारों के दायरे में आते हैं। उनकी बड़ी संख्या को इस दायरे से बाहर रखना, नियमित एवं स्थाई मजदूरों के स्थान पर अनियमित/अस्थाई /ठेका /कैजुअल मजदूरों से काम करने की प्रणाली को प्रोत्साहन देना।
फिक्स टर्म अपॉइंटमेंट जैसी नई प्रणाली लाकर नियमित/स्थाई मजदूर को धीरे-धीरे खत्म करना है।मजदूरकी छटनी/ लेआफ/ बंदी को आसान बनाकर नियोक्ताओं को हायर एंड फायर अर्थात मज़दूरों को जब चाहो काम पर रखो जब चाहो काम से हटाओ।
कामरेड सिंह ने कहा कि उन 44 श्रम कानून जिन्हें अब यह 29 श्रम कानून बता रहे हैं को चार श्रम सहिताओं में विलोपित कर दिया गया है।
न्यूनतम मजदूरी कानून (मिनिमम बेस एक्ट 1948)
मजदूरी संदाय कानून (पेमेंट्स का वेजेस एक्ट 1936)
बोनस संदाय कानून (पेमेंट का बोनस एक्ट 1965)
समान पारिश्रमिक कनून (इक्वल रैम्यूनरेशन एक्ट 1967)।
नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं चाहती कि लोग अपने माता-पिता, दादा-दादी का भरण पोषण करें, सरकार शायद यह भी भूल गई की इस समय एक कानून है, जिसका नाम है माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं कल्याण कानून 2007। यह कानून कहता है की माता-पिता और अन्य वरिष्ठ एवं बयोवृद्धि सदस्यों के भरण पोषण की ज़िम्मेदारी परिवार के कमाने वाले व्यक्ति पर है। सरकार ने इस बात को अनदेखा कर दिया कि अनेक परिवारों में अल्प वयस्क भाई और बहने भी परिवार के कमाने वाले सदस्य पर आश्रित और निर्भर होते हैं।
कामरेड सिंह ने कहा देश का मजदूर चारों नये काले श्रम संहिताओं कानून को वापस लेने व रद्द करने के लिए अपनी एकता जागरूकता का प्रदर्शन करना जारी रखेगा।
इस कार्यक्रम को सीटू से कॉमरेड एस एन बनर्जी, एटक से एस के सिंह, धर्मेंद्र तिवारी, एम एल रजक जी ने भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम में सैकड़ो लोग उपस्थित हुए और सभी ने अंत में चार श्रम कोड बिल को जलाकर विरोध दिवस मनाया गया।
