अदम्य शौर्य और वीरता का प्रतीक थीं रानी लक्ष्मीबाई

ढेलवाडीह में जयंती पर हुआ आयोजन
कोरबा 20 नवम्बर। स्वाधीनता संग्राम में अपना अतुल्य योगदान देने वाली झांसी की रानी लक्ष्मी बाई अदम्य शौर्य, साहस और वीरता का अद्भुत उदाहरण थी। उन्होंने अपने दौर में भी नारी सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ी लकीर खींची और महिलाओं को पराक्रम दिखाने के लिए प्रेरित किया।
मनु के नाम से पहचानी जाने वाली रानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवंबर को कोरबा जिले के ढेलवाडीह स्थित लक्ष्मीबाई विद्यालय में मनाई गई। कोरबा जिला अशासकीय विद्यालय प्रबंधक संघ के अध्यक्ष अक्षय दुबे ने इस मौके पर रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से जुड़े विभिन्न पक्षों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि बहुत कुछ सोचकर हमने वीरांगना के नाम से इस विद्यालय की शुरुआत की। आज जब जयंती मनाई जा रही है तो सभी विद्यार्थियों को इस चरित्र के बारे में दिया जाना आवश्यक है। अक्षय ने अपने विचार को आगे बढ़ाते हुए बताया कि किस तरह अंग्रेजी सत्ता से लोहा लेने के साथ उन्हें नाकों चने चबाने के लिए इस भारतीय वीरांगना ने अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने जीवनकाल में तय किया था कि चाहे कुछ हो जाए लेकिन अंग्रेज उन्हें छू नहीं सकेंगे। यही कारण रहा कि जब अंतिम समय में उन्होंने जीवन को संकट में घिरा पाया तो आत्म उत्सर्ग कर दिया।
विद्यालय के शिक्षकों और अतिथियों के द्वारा भी इस मौके पर अपनी बात रखी गई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वाधीनता संग्राम भारतीय इतिहास का बहुत दीर्घ अध्याय रहा है। अनगिनत सूरवीरों की भूमिका इसमें दर्ज हुई और उन्होंने ब्रितानी हुकूमत को भारत से खदेडने के लिए अपना विशिष्ट योगदान दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की ओर से कई सवाल किए गए जिसका संतोषजनक जवाब दिया गया।
प्रोजेक्टर पर देखा इतिहास
हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के लिए इस कार्यक्रम के अवसर पर रानी लक्ष्मीबाई से संबंधित एक वृत्त चित्र का प्रदर्शन प्रोजेक्टर पर किया गया। इसमें मध्य प्रदेश सीमा के नजदीक स्थित ऐतिहासिक शहर झांसी का किला और आसपास में मौजूद हथियार, रानी लक्ष्मी बाई की वीरगाथा को दिखाया गया। विद्यार्थियों ने इस वृत्त चित्र के माध्यम से अतीत के उन पन्नों की जानकारी प्राप्त की जिम रानी लक्ष्मीबाई ने महिला होने के बावजूद एक कुशल योद्धा का परिचय दिया और अपने दुश्मनों के दांत खट्टे किए।
