डायल 108 पर लगा ब्रेक, मरीजों को अस्पताल ले जाने नहीं मिली सेवा

कोरबा/पसान। कोरबा जिले के अंतिम छोर पर बसे दूरस्थ वनांचल क्षेत्र पसान के ग्रामीण आज भी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में डायल 108 एम्बुलेंस सेवा पिछले एक माह से ठप्प पड़ी हुई है, जिससे किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह क्षेत्र न केवल वनांचल के रूप में जाना जाता है, बल्कि हाथी प्रभावित इलाकों में भी गिना जाता है। जंगलों की अधिकता के कारण यहां रात्रि के समय यात्रा करना अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है। ऐसे में किसी बीमार व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।
पसान में एक उप-स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, जिसके अंतर्गत ग्रामीणों की सुविधा के लिए एक वाहन पर डायल 108 एम्बुलेंस सेवा दी गई थी। लेकिन पिछले लगभग एक महीने से यह सेवा पूरी तरह से बंद पड़ी है। इस कारण गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में भारी कठिनाइयां हो रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पोंडी-उपरोड़ा मुख्यालय के बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) को इस समस्या से अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न तो डायल 108 सेवा को फिर से शुरू किया गया है और न ही किसी वैकल्पिक व्यवस्था की पहल की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को गंभीर स्थिति में अपने निजी साधनों या किराए के वाहनों से कई किलोमीटर दूर स्थित अस्पतालों तक ले जाना पड़ता है। इससे आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से ग्रामीण वर्ग पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से डायल 108 सेवा को शीघ्र बहाल करने तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की है, ताकि किसी भी आपातकाल में लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
