हसदेव नदी को मिलेगी नई पहचान…नदी के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर उठी जनजागृति की लहर

उप मुख्यमंत्री अरुण साव को सौंपा गया रिवर फ्रंट निर्माण का ज्ञापन
नमामि हसदेव सेवा समिति ने बिलासपुर स्थित निजी कार्यालय में की मुलाकात

कोरबा। कोरबा जिले की जीवनदायिनी हसदेव नदी के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नमामि हसदेव सेवा समिति ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। समिति के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव से बिलासपुर स्थित उनके निजी कार्यालय में भेंट कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कोरबा में रिवर फ्रंट निर्माण की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।

समिति ने कहा कि हसदेव नदी केवल कोरबा की जीवनरेखा ही नहीं, बल्कि इसका धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व भी अत्यधिक है। वर्तमान में यह नदी क्षेत्र अव्यवस्था, असुरक्षा और प्रदूषण की चपेट में है, जिसे एक सुव्यवस्थित और सुंदर रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाना अत्यावश्यक है। समिति ने इस रिवर फ्रंट परियोजना को कोरबा की भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर बताया।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे ये सदस्य
श्रेष्ठ सिंह ठाकुर (संरक्षक), चन्द्र किशोर श्रीवास्तव (अध्यक्ष), रणधीर पाण्डेय (कार्यकारी अध्यक्ष), नरेश कुमार अरोरा, रवीन्द्र पाराशर (उपाध्यक्ष), यशवंत कुमार मिश्रा (सचिव), सुखविंदर सिंह धंजल, विजय कुमार राठौर (संयुक्त सचिव), दीपक अग्रवाल (कोषाध्यक्ष), मोहनधर दीवान (आचार्य सह प्रमुख), प्रकाश सिंह चाहल (पर्यावरण प्रमुख), अखिलेश भारती (हनुमान चालीसा पाठ प्रमुख), मनीष मैत्री (सह प्रमुख)।

चलाया जा रहा हस्ताक्षर अभियान
समिति द्वारा हसदेव नदी को संरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए श्रावण पूर्णिमा (9 अगस्त 2025) से लेकर आश्विन पूर्णिमा (7 अक्टूबर 2025) तक हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। समापन अवसर पर 7 अक्टूबर को संकल्प सभा का आयोजन होगा, जिसमें साध्वी गिरिजेश नंदनी जी (स्वामी भजनानंद आश्रम, केन्दई) और संत रामरूपदास महात्यागी जी (मदकू द्वीप) का सानिध्य प्राप्त होगा। अभियान का अगला चरण 5 नवम्बर से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा।

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