कोरबा में अधिग्रहित ग्राम हरदीबाजार के ग्रामीणों का अल्टीमेटम, 7 प्रमुख मांगों पर अड़े

कोरबा। दीपका परियोजना के अंतर्गत अधिग्रहित ग्राम हरदीबाजार के ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। ग्राम पंचायत व ग्रामीणों ने साफ किया है कि जब तक उनकी सातों प्रमुख मांगों पर लिखित समझौता नहीं होता, तब तक किसी भी तरह का सर्वे या मकान तोड़ने की कार्यवाही नहीं होने दी जाएगी।

ग्रामीणों ने पुनर्वास स्थल पर नाली, पानी, बिजली, सड़क, हाट-बाजार, खेल मैदान और सभी विभागों के कार्यालय उपलब्ध कराने की मांग रखी है। साथ ही हाईकोर्ट बिलासपुर के आदेश के अनुसार प्रत्येक प्रभावित परिवार को एसईसीएल दीपका परियोजना में नौकरी देने पर जोर दिया है।

इसके अलावा ग्रामीणों ने 2004 और 2010 में नामांतरण/प्रमाणीकरण कराने वाले सभी ज़मीन मालिकों को 100% मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि मकानों और संपत्तियों की नापी के समय ही मुआवजा राशि और मालिकाना हक़ का पट्टा दिया जाए।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी आदेशों के अनुसार मकान तोड़ने से पहले एकमुश्त मुआवजा देना अनिवार्य किया जाए। साथ ही अनुसूचित क्षेत्र में पेसा एक्ट के तहत अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया ग्राम पंचायत व ग्रामसभा की सहमति से ही पूरी की जाए।

ग्रामीणों की सातवीं प्रमुख मांग यह है कि जिन परिवारों के मकान तोड़े जाएंगे, उन्हें उसी दिन मुआवजा राशि दी जाए और स्थानीय बेरोजगारों को निजी कंपनियों में तत्काल नौकरी उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस और लिखित समझौता नहीं होता, तो वे किसी भी प्रकार की परियोजना कार्यवाही नहीं होने देंगे।

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