प्रथम सावन सोमवार को आस्था का ज्वार, भक्तों ने किया जलाभिषेक

ब्रह्म मुहूर्त में पहुंचे भक्त कांवरियों में दिखा उत्साह
कोरबा 14 जुलाई। श्रवण मास के पहले सोमवार को कोरबा जिले में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शिवालयों में अलसुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। जिले के तीन प्रमुख स्थलों से कांवड़ यात्रा निकालते हुए श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ को जल अर्पित किया। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से संपन्न कराए गए।
सावन के सोमवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। वर्ष 2025 के पहले सावन सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही भक्तों की कतारें शिवालयों में लग गईं। मंदिरों के प्रवेश द्वार पर लगे घंटों की मधुर ध्वनि से माहौल भक्तिमय हो गया। कोरबा में हसदेव नदी के सर मंगला घाट से श्रद्धालु जल लेकर रात्रि में कनकेश्वर धाम कनकी की पदयात्रा पर निकले। अगली सुबह उन्होंने चक्रेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया। वहीं, विकासखंड पाली के नर्सिंग गंगा से जल लेकर आए भक्तों ने कटघोरा की हनुमानगढ़ी स्थित शिवालय में जल अर्पित किया। कोरकोमा के शंकर खोल मंदिर में भी भक्तों ने कांवड़ यात्रा के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाकर श्रद्धा प्रकट की। कोरबा के कपिलेश्वर नाथ मंदिर, सुभाष ब्लॉक स्थित शिव मंदिर, सीसीएल कॉलोनी के मृत्युंजय मंदिर, नगर निगम कॉलोनी के त्रिलोकी नाथ मंदिर, सीतामढ़ी का सत्यदेव मंदिरमें हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
श्रावण सोमवार पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनोंकृकांवडिया संघ, अग्रवाल समाज, मारवाड़ी युवा मंच, लायंस क्लब और ग्राम जागृति संघकृद्वारा मंदिरों के पास सेवा शिविर लगाए गए। इन शिविरों में भक्तों को विश्राम, जलपान और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं दी गईं। आयोजकों ने यह भी कहा कि सावन के प्रत्येक सोमवार पर सेवाएं जारी रहेंगी।
विक्रमादित्य द्वितीय के शासनकाल में कोरबा जिले के पाली में भगवान शिव का मंदिर का निर्माण कराया गया था। 11वीं शताब्दी का यह मंदिर इतिहास का साक्षी बना हुआ है और इसके प्रति न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि विभिन्न राज्यों के श्रद्धालुओं की अतिव आस्था है। यहां की वास्तुकला इस बात को दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भारत में भवन निर्माण की तकनीक और उसमें काम करने वाला वर्ग कितना कार्य कुशल रहा होगा। भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में इस मंदिर को रखा गया है। प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के द्वारा महाशिवरात्रि पर आयोजित किया जाने वाला पाली महोत्सव इस धार्मिक विरासत को नई पहचान देने का माध्यम बना हुआ है। बताया गया कि पूरे सावन के महीने में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
