कही-सुनी @ रवि भोई

कही-सुनी (13 JULY-25) : रवि भोई
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल की सक्रियता के मायने
महीनों में संगठन के एक बड़े पदाधिकारी से मिलकर उन्हें अपनी इच्छा से अवगत करा चुके हैं। अब देखते हैं पूर्व मंत्री को संगठन में क्या जिम्मेदारी मिलती है। जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नेताजी एक जमाने में बड़े पावरफुल थे। सरकार और संगठन दोनों में पकड़ थी। समय के साथ सबकुछ बदल गया। खबर है कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ प्रदेश ईकाई का पुनर्गठन हो जाएगा। कुछ पदाधिकारी निगम-मंडल के अध्यक्ष बन गए हैं, उनकी जगह नई नियुक्ति होनी है। इसके अलावा कुछ नए चेहरों को किरणदेव की टीम में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि जुलाई में ही तस्वीर साफ़ हो जाएगी।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नई केमेस्ट्री
कहते हैं नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव की केमेस्ट्री मिल गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अलग लाइन में चल रहे हैं तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की धारा भी अलग बह रही है। नेता प्रतिपक्ष महंत, सिंहदेव को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में हैं। बताते हैं भूपेश बघेल और दीपक बैज, सिंहदेव के पक्ष में नहीं हैं। आदिवासी नेता को हटाकर सामान्य वर्ग के नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में न तो बघेल हैं और न ही बैज। इस कारण नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का मामला लटका पड़ा है। महंत और सिंहदेव एक आदिवासी और एक अनुसूचित जाति वर्ग के नेता को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का फार्मूला दिया है,पर जो भी फैसला होगा, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही होगा। ऐसे में अभी दीपक बैज के चलते रहने की संभावना है और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेता अपनी ढ़पली अपना राग बजाते दिखेंगे। जैसा कि भूपेश बघेल संगठन को बिना सूचना दिए ही एक विधायक के न्यौते पर रायगढ़ में पेड़ कटाई का विरोध करने चले गए।
मुख्यमंत्री साय का साहसिक कदम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दिखने और बोलने में भले ही सरल लगते हों, पर फैसला तो कड़ा लेते हैं। यह साबित हो गया शराब घोटाले में शामिल 22 आबकारी अधिकारियों के निलंबन से। आमतौर पर आबकारी विभाग के अफसर दुधारू गाय की तरह होते हैं। सरकार आबकारी या फिर राजस्व संग्रहण से जुड़े विभागों के अफसरों पर सख्त कदम उठाने से बचती है। मुख्यमंत्री साय ने आबकारी विभाग को ही सुधारने की नहीं ठानी,शिक्षा विभाग के कायाकल्प का कदम उठाया। स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कर वोट बैंक की चिंता किए बगैर शिक्षकों को व्यवस्थित किया। युक्तियुक्तकरण को लेकर कहीं-कहीं शिक्षक नाराज भी हुए, पर उन्होंने परवाह नहीं की।
तकनीकी विश्वविद्यालय को कब मिलेगा वीसी
छत्तीसगढ़ के ट्रिपल आईटी को लंबे इंतजार के बाद डायरेक्टर मिल गया। लोग चर्चा कर रहे हैं कि राज्य के स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय को कुलपति कब मिलेगा? भिलाई स्थित तकनीकी विश्वविद्यालय में कुलपति का पद पिछले करीब आठ माह से रिक्त है। आमतौर पर छह माह के भीतर कुलपति की नियुक्ति हो जाती है। कहते हैं नए कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी बन गई है, पर उसके बाद का मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। तकनीकी विश्वविद्यालय के अधीन राज्य के सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कालेज आते हैं।
नमक सप्लाई की जुगत में लगे लोग
कहते हैं छत्तीसगढ़ की सरकार आदिवासी जिलों में मुफ्त वितरण के लिए जल्दी ही करोड़ों रुपए का नमक खरीदने वाली है। चर्चा है कि राज्य में नमक सप्लाई करने वाले जुगत बैठाने में लग गए हैं। बताते हैं इसके लिए कुछ बिचौलिये भी सक्रिय हो गए हैं। खबर है कि सरकार बस्तर जिले के लिए करीब 40 करोड़ रुपए का और सरगुजा के लिए 35 करोड़ रुपए का नमक खरीदने वाली है। कहा जा रहा है कि खरीदी के लिए अभी नीति बनी नहीं है। इस कारण बिचौलिये अपनी-अपनी गोटी फिट करने में लग गए हैं।
स्थायी डीजीपी पर कब होगा फैसला
छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए संघ लोक सेवा आयोग से पैनल आए करीब दो महीने हो गए हैं, पर अभी तक सरकार ने कोई फैसला नहीं किया है, ऐसे में चर्चा होने लगी है कि छत्तीसगढ़ में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति कब होगी। नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद छह महीने अशोक जुनेजा एक्सटेंशन पर डीजीपी रहे, फिर अरुणदेव गौतम कार्यकारी डीजीपी बने। पूर्णकालीक डीजीपी के इंतजार में गौतम साहब के कंधे पर छत्तीसगढ़ की कानून-व्यवस्था का भार है। अब गौतम साहब पूर्णकालीक डीजीपी बनते हैं या हिमांशु गुप्ता। या फिर पवनदेव या जीपी सिंह की लाटरी लग सकती है, इस पर कयासबाजी चल रही है।
नरेश गुप्ता का तीर
भाजपा नेता नरेश गुप्ता ने शराब घोटाले में उलझे 22 आबकारी अधिकारियों पर ऐसा तीर मारा कि सभी के सभी निलंबित हो गए। नरेश गुप्ता ने इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए शासन-प्रशासन और विभिन्न एजेंसियों में शिकायत की थी। नरेश गुप्ता के ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 22 आबकारी अधिकारियों को एक झटके में निलंबित कर दिया। शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू ने 29 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में चालान भी पेश कर दिया है। अब माना जा रहा है कि निलंबित आबकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
