छत्तीसगढ़ के लाल अनिमेष कुजूर ने रचा नया इतिहास, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई

रायपुर 10 जुलाई 2025/ छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर ने ग्रीस के एथेंस में आयोजित ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट मीट में 100 मीटर दौड़ को मात्र 10.18 सेकेंड में पूरा कर भारत के लिए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम सभी के लिए यह अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है कि छत्तीसगढ़ के अनिमेष कुजूर ने ग्रीस में आयोजित ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट मीट में 100 मीटर दौड़ को मात्र 10.18 सेकेंड में पूरा कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया है। इससे पहले अनिमेष ने दक्षिण कोरिया में हुए एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 200 मीटर दौड़ को 20.32 सेकेंड में पूरा कर एक और राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया था। उन्होंने युवा खिलाड़ी अनिमेष को बधाई देते हुए कहा कि आपकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि हर युवा को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। छत्तीसगढ़ को आप पर गर्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष की यह उपलब्धि युवा शक्ति के आत्म विश्वास और सपनों की उड़ान का प्रतीक है। उनका यह प्रदर्शन न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है। प्रदेश सरकार युवाओं की प्रतिभा को पहचानने और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ की माटी के लाल अनिमेष कुजूर ने अपने बुलंद हौसलों से खुद को देश का सबसे तेज धावक बना लिया है। उन्होंने शनिवार को ग्रीस में ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट एंड रिलेज मीटिंग में अपनी दमदार क्षमता का प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया है। बता दें कि कुजूर अभी महज 22 साल के हैं और उन्होंने ग्रीस की राजधानी एथेंस के उपनगर वारी में मीट में गुरिंदरवीर सिंह के 100 मीटर के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है।
ऐसे बनाया रिकॉर्ड
ग्रीस में आयोजित ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट और रिले मीटिंग 2025 में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में अनिमेष ने ऐसे दौड़ लगाई की पूरी दुनिया देखती रह गई। बता दें कि अनिमेष ने 10.18 सेकेंड के शानदार समय के साथ 100 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इससे पहले गुरिंदरवीर सिंह के नाम यह रिकॉर्ड था। उन्होंने 100 मीटर की रेस को 10.20 सेकेंड में चेज कर रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन अब वह दूसरे स्थान पर खिसक गए है। ग्रीस के सोटिरियोस गारगैनिस (10.23 सेकंड) और सैमुली सैमुएलसन (10.28 सेकंड) वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर लेबल मीट में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
बचपन सरगुजा में बीता
अनिमेष कुजूर का जन्म छत्तीसगढ़ के जशपुर के घुईटानगर गांव में हुआ। अनिमेष उरांव समुदाय से हैं। उनका बचपन का सरगुजा में बीता। अंबिकापुर के सैनिक स्कूल में भी पढ़ाई की। पिता के नौकरी की वजह से अनिमेष कुजूर की शिक्षा शुरूआती समय में काफी प्रभावित रही। उनके पिता की नौकरी जहां ट्रांसफर होती थी। वहां उन्हें एक नया स्कूल मिलता था। अनिमेष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा छत्तीसगढ़ स्थित महासमुंद जिले के वेडनर मिशन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी होने के बाद वह कांकेर आ गए। जहां उन्होंने सेंट माइकल स्कूल से आगे की शिक्षा पूरी की।

जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर के अनिमेष कुजूर ने भारतीय एथलेटिक्स में इतिहास रच दिया है। 5 जुलाई 2025 को ग्रीस के वारी शहर में आयोजित ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट मीट में उन्होंने 100 मीटर दौड़ 10.18 सेकंड में पूरी कर भारत का सबसे तेज समय दर्ज किया। इस प्रदर्शन ने उन्हें भारत का सबसे तेज धावक बनाया और भारतीय एथलेटिक्स को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी।

हालांकि इस स्पर्धा में अनिमेष को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। पहला और दूसरा स्थान क्रमशः दक्षिण अफ्रीका और ओमान के धावकों ने हासिल किया, लेकिन उनका समय भारतीय रिकॉर्ड से बेहतर रहा। उनके पिता अमृत कुजूर बताते हैं, ‘जब अनिमेष को बताया गया कि उसने 10.18 सेकंड में दौड़ पूरी की, तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि उसने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया।’ 

नंगे पांव से अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक
अनिमेष की कहानी प्रेरणादायक है। जशपुर के कुनकुरी विकासखंड के घुइटांगर गांव की पगडंडियों पर नंगे पांव दौड़ने से शुरू हुआ उनका सफर आज ग्रीस के ट्रैक तक पहुंचा है। उनके माता-पिता छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार स्थानांतरण के कारण अनिमेष का बचपन महासमुंद और कांकेर में बीता। छठी कक्षा में सैनिक स्कूल अंबिकापुर में चयन ने उनकी जिंदगी बदल दी। यहां के अनुशासन और प्रशिक्षण ने उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाया। कोविड काल में स्कूल बंद होने के बावजूद अनिमेष ने ट्रैक पर अभ्यास जारी रखा। 

पांच स्वर्ण पदक
अनिमेष ने कांकेर में आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, लॉन्ग जंप और हाई जंप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद रायपुर में वेस्ट ज़ोन एथलेटिक्स मीट में 100 और 200 मीटर में स्वर्ण पदक जीते। गुवाहाटी में आयोजित नेशनल अंडर-18 मीट में पहली बार स्पाइक शूज़ पहनकर दौड़ने के बावजूद उन्होंने 100 और 200 मीटर में चौथा स्थान हासिल किया। इसके बाद अनिमेष ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।  

भारत का नया यूथ आइकन
अनिमेष की सफलता केवल एक एथलीट की जीत नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से उभरती प्रतिभाओं का प्रतीक है। उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बताती है कि समर्पण और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

खेल मंत्रालय और फेडरेशन की बधाई
खेल मंत्रालय और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अनिमेष को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी है। सोशल मीडिया पर खेल प्रेमी इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए ‘नया युग’ बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनिमेष भविष्य में ओलंपिक और एशियन गेम्स में भारत की बड़ी उम्मीद बन सकते हैं। 

जशपुर जैसे सुदूर आदिवासी जिले से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने वाले अनिमेष कुजूर की यह कहानी साबित करती है कि जज़्बा और मेहनत के आगे कोई बाधा नहीं टिकती। उनकी यह दौड़ न केवल समय की, बल्कि सपनों और उम्मीदों की भी जीत है। 

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