गुड़ कर्मचारियों का पर मिठास अधिकारियों के हिस्से.. कोरबा के DSPM में सुशासन का हुआ गुड़ गोबर
मुख्यमंत्री के विभाग में ही बैठे हैं दुशासन, फिर कैसे आएगा प्रदेश में सुशासन

कोरबा 01 जून। प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पिछले कुछ माह से सुशासन तिहार मना रही थी जिसका समापन कल हुआ। परंतु सुशासन तिहार के समापन दिवस पर ही मुख्यमंत्री के विभाग में चल रहे कुशासन का भाँडाफोड़ हो गया जिससे पूरे विभाग में अब हड़कंप मचा हुआ है।
एक ओर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री गली गली गांव गांव पहुंचकर सुशासन को घर-घर पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हीं के विभाग के अधिकारी उनकी इस मुहिम को पलीता लगाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं। ऐसा ही मामला विद्युत कंपनी के कोरबा स्थित डी.एस.पी.एम प्लांट में सामने आया जहां प्रदूषण की मार झेलने वाले तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारीयों को प्रदान किए जाने वाले गुड़ में प्लांट के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सेंधमारी की जा रही है। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी की सुशासन तिहार के समापन दिवस पर सामने आए इस घोटाले ने विष्णु देव सरकार के सुशासन का गुड़ गोबर कर दिया है।
बता दे की वर्ष 2003 के शासकीय आदेश अनुसार विद्युत कंपनी के संयंत्रों में कार्य करने वाले तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्लांट से उत्सर्जित कोयले व राखड़ के प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए प्रति व्यक्ति 100 ग्राम गुड़ प्रतिदिन दिया जाना होता है। सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरबा स्थित डीएसपीएम प्लांट में गुड़ प्राप्त करने वाले पात्र कर्मचारियों की संख्या 160 है परंतु अधिकारियों द्वारा 400 लोगों को गुड़ का वितरण किया जा रहा है। 160 पात्र कर्मचारियों के अलावा जिन 240 अपात्र लोगों को कथित रूप से गुड़ का वितरण किया जा रहा है उनमें अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता व सहायक अभियंता जैसे वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारी भी है। इससे यह स्पष्ट है कि इस घोटाले में प्लांट में कार्यरत सर्वोच्च अधिकारी भी शामिल है।
सूचना के अधिकार अंतर्गत प्रदत्त जानकारी के अनुसार संयंत्र द्वारा क्रय आदेश के तहत 400 लोगों के लिए 12000 किलो गुड़ प्रति वर्ष खरीदा जा रहा है, जिसकी कीमत लगभग 5,95,920 रुपये है। लेकिन वास्तव में संयंत्र में केवल 160 तकनीकी कर्मचारी कार्यरत हैं। इस तरह से 240 अपात्र लोगों को गुड़ वितरित कर कंपनी को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। कोरबा स्थित डीएसपीएम प्लांट के अलावा विद्युत कंपनी के एचटीपीएस कोरबा पश्चिम, मड़वा तथा प्रदेश भर में स्थित संयंत्रों में भी इसी प्रकार से बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने की संभावना है। वहीं डीएसपीएम प्लांट में ही अन्य विभागों में भी जमकर भ्रष्टाचार होने की खबर है। आने वाले दिनों में इन सभी घोटालों का पर्दाफाश कर इनमें संलिप्त अधिकारियों को बेनकाब किया जावेगा।
KGF की तर्ज पर संचालित हो रहा DSPM
कहने को तो प्रदेश की विष्णुदेव सरकार शासकीय कार्यों में पारदर्शिता लाने पर जोर दे रही है। लेकिन बात करें कोरबा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (DSPM) विद्युत संयत्र की तो इसे अधिकारियों द्वारा मशहूर फिल्म KGF की तर्ज पर संचालित किया जा रहा है। बिना उनकी इजाजत, कोई गेट के अंदर दाखिल भी नहीं हो सकता। संयंत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों अधिकारियों के अलावा केवल अधिकारियों के चहेते ठेकेदारों और दलालों को ही प्लांट में प्रवेश प्राप्त होता है। आम आदमी तो छोड़िए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारों को भी गेट से ही नाम पूछ कर रफा-दफा कर दिया जाता है और अधिकारी उनका फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझते। यही कारण है की प्लांट में घटित हो रहे घोटालों की जानकारी बाहर आ नहीं पाती और अधिकारी करोड़ो अरबों का खेल कर निकल जाते हैं। NHAI में राखड़ आपूर्ति घोटाला इसका एक उदाहरण मात्र है जिसका खुलासा कुछ माह पहले NHAI के अधिकारियों के एक पत्र से हुआ था। इस प्रकरण में भी कंपनी के अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही आज दिनाँक तक नहीं गई है।
जब मुख्यमंत्री के खुद के विभाग का यह हाल है तो शासन के अन्य विभागों में पारदर्शिता लाना तो मुंगेरीलाल के सपने सजाने जैसा प्रतीत होता है।
