वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा और विज्ञान को आमजन तक पहुंचाने में समर्पित डॉ नार्लीकर नहीं रहे

पुणे. मशहूर खगोलविद डॉ. जयंत नार्लीकर (87) का मंगलवार 20 मई 2025 को तड़के पुणे में निधन हो गया। परिजनों के मुताबिक उन्होंने नींद में आखिरी सांस ली। पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. नार्लीकर का जीवन वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा और विज्ञान को आम जन तक पहुंचाने के प्रति समर्पित रहा। उनकी विज्ञान कथाएं और विज्ञान से जुड़ा लेखन काफी लोकप्रिय रहा।
डॉ. नार्लीकर साइंस कम्युनिकेट भी थे। यानी जटिल वैज्ञानिक जानकारी आसान भाषा में समझाते थे। वह ‘हॉयल-नार्लीकर थ्योरी ऑफ ग्रैविटी’ के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें ‘महाराष्ट्र भूषण’ पुरस्कार सम्मानित किया था।
बचपन से होनहार
कहा जाता है कि डॉ. नार्लीकर 10 साल की उम्र में जटिल गणितीय समस्याएं हल करने लगे थे। बीएचयू से स्नातक डिग्री के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से गणित में स्नातकोत्तर और पीएचडी की। वहां उन्हें टायसन मेडल और स्मिथ्स पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
