जम्मू कश्मीर: खुफिया एजेंसियों ने घाटी में सक्रिय 14 स्थानीय आतंकियों की हिट लिस्ट तैयार की, काल बनकर टूटेंगे उन पर

नई दिल्ली/श्रीनगर. पहलगाम आतंकी हमले के गुनहगारों की तलाश के बीच सुरक्षा बल आने वाले दिनों में उनके मददगारों पर काल बन कर टूटेंगे।

खुफिया एजेंसियों ने कश्मीर घाटी में सक्रिय 14 स्थानीय आतंकियों की हिट लिस्ट तैयार की है। इनमें से तीन-तीन आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े हैं जबकि आठ आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के गुर्गे हैं। लश्कर से जुड़े आतंकियों की सूची में वे दो आतंकी भी शामिल है जो पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले टीआरएफ के लिए काम करते है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार 20 से 40 वर्ष की आयु के ये लोग पाकिस्तान से विदेशी आतंकियों को रसद और जमीनी स्तर पर सहायता प्रदान करके सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां इन 14 आतंकियों के के उन पांच ‘आतंकियों के साथ संबंधों और उनकी भूमिका का पता लगाने में जुटी है, जिन्होंने पहलगाम हमले को अंजाम दिया था। लश्कर और टीआरएफ के लिए काम कर रहा शोपियां जिले का आतंकी अदनान सफी डार पाकिस्तानी हैंडलरों से अन्य आतंकियों तक सूचना – पहुंचाने का काम करता है।

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी

आविल रहमान डेन्टू (21) – सोपोर जिला कमांडर

अहसान अहमदशेख (23)-पुलवामा

हारिस नजीर (20) – पुलवामा

नसीर अहमव वानी (21) – शोपियां

शाहिद अहमद कुटे (27)

टीआरएफ शोपियां

आमिर अहमद डार – शोपियां

अदनान सफी डार टीआरएफ, शोपियां

जैश ए मोहम्मद से जुड़े

आसिफ अहमद शेख (28) अवंतीपुरा का जिला कमांडर

आमिर नजीर वानी (20) – पुलवामा

यावर अहमद भट – पुलवामा

हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी

आसिफ अहमद खांडे (24)-शोपियां

जुबैर अहमद वानी (39) ऑपरेशन कमांडर, अनंतनाग

हारून राशिद गनई (32)

जाकिर अहमद गनी (29)

भारत के खौफ से पलटा टीआरएफ पहले ली थी घटना की जिम्मेदारी

टीआरएफ ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। संगठन ने इसे एक झूठा, जल्दबाजी और सुनियोजित प्रयास बताया है जिसका मकसद कश्मीर की प्रतिरोध भावना को बदनाम करना है। टीआरएफ ने खुद को स्थानीय, मानसिक और नैतिक प्रतिरोध आंदोलन बताया है और कहा कि उनका संघर्ष आजादी के लिए नहीं है, बल्कि बेकसूर लोगों की हत्या के लिए। वकील ने कहा हम न तो किसी के एजेंट हैं, न ही किसी झूठे झंडे का हिस्सा। हमले के तुरंत बाद संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक छोटा लेकिन अधिकृत संदेश पोस्ट किया गया था। संगठन ने कहा कि जांच से पता चला कि यह एक साइबर हमले से हुआ था, जिसमें भारतीय खुफिया एजेंसियों का संदेह था। यह कोई नई रणनीति नहीं है, और भारतीय एजेंसियां अक्सर डिजिटल तकनीक का उपयोग कर भ्रम फैलाने और झूठी जिम्मेदारी ठहराने का काम करती हैं।

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