एल्डरमेन नियुक्तिः थोक में आ रहे आवेदन, नगर निगम में 14 व छोटे निकायों में पांच बनाने हैं

कोरबा 17 मार्च। प्रदेश में सरकार गठन के सवा साल हो चुके हैं। लोकसभा और नगरीय निकाय चुनाव की प्रतीक्षा करने के बाद अब सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। खबर है कि जल्द ही निकायों में एल्डरमेन की नियुक्ति की जा सकती है। सरकार ने इसके लिए पैरामीटर बनाया जरूर है लेकिन नियुक्ति अपने हिसाब से होगी। इधर नगर निगम कोरबा में एल्डरमेन बनने के लिए भाजपा के सक्रिय ही नहीं बल्कि कुछ दिन पहले आए चेहरों ने भी दावा पेश करना शुरू कर दिया है। उन्हें लगता है कि सांठगांठ के दम पर यह काम हो जाएगा। नगर निगम में 14 और छोटे निकायों में पांच एल्डरमेन बनाने हैं।
निगम में एल्डरमेन की संख्या पहले 8 हुआ करती थी जिसे बढ़ा दिया गया है। कुल संख्या में 33 प्रतिशत के पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। छत्तीसगढ़ में निकायों के चुनाव में भाजपा को शानदार सफलता मिली है। इसलिए कहा जा रहा है कि सरकार एल्डरमेनों की नियुक्ति में और ज्यादा विलंब नहीं करना चाहती ताकि कार्यकर्ताओं को इस पद पर काम करते हुए अच्छा समय मिल सके। तय है कि जो भी एल्डरमेन बनेंगे वे बमुश्किल साढ़े तीन साल ही काम कर सकेंगे।
सूत्रों के अनुसार 67 वार्ड वाले नगर निगम कोरबा में एल्डरमेन की संख्या सुनिश्चित है। लेकिन पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की महत्वकांक्षा अलग-अलग पदों को लेकर उछाल मार रही है। बड़े पद को किनारे कर दिया जाए तो बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जो एल्डरमेन के सपने देख रही है। हैरानी की बात यह है कि कोरबा के कोसाबाड़ी मंडल में ही 150 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। नेताओं को पता है कि कौन कितने गहरे पानी में है और कब से संगठन के लिए काम कर रहा है। यही हाल कोरबा नगर मंडल और सर्वमंगला व दर्री मंडल का है। यहां भी अच्छी-खासी संख्या में दावेदार अपने आवेदन जमा करने में लगे हुए हैं।
पदाधिकारियों को आवेदन लेने से कोई परेशानी नहीं है लेकिन वे इस बात को लेकर मुश्किल में हैं कि हर कोई अपने-आपको पार्टी का निष्ठावान और दीर्घकालिक कार्यकर्ता बताने से नहीं चूक रहा है। वे अपने आवेदन में ऐसे कार्यों का उल्लेख कर रहे हैं मानों चुनाव के दौरान और कांग्रेस की सरकार के दौरान किसी ने उनकी भूमिका का अवलोकन न किया हो। कहा जा रहा है कि पार्टी के पास उन सभी कार्यकर्ताओं की बेहतर जानकारी है जिन्होंने आड़े वक्त में संगठन के लिए काम किया। कहा जा रहा है कि ऐसे ही कई आधार पर नगरीय निकाय से लेकर सरकार निगम मंडल और दूसरी संस्थाओं में अपने योग्य और सक्रिय कार्यकर्ताओं का सदुपयोग करने वाली है।
सूत्रों ने बताया कि एल्डरमेन के लिए ऐसे आवेदकों की भी भरमार है जिनकी भारतीय जनता पार्टी में एंट्री ही पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान हुई। पार्टी की बढ़ती संभावनाओं और अपना फेस चमकाने के इरादे से बहुत सारे लोग भाजपा का हिस्सा बन गए थे। चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे लोगों ने सीमित घंटे प्रचार में हिस्सा लिया और इसके मुकाबले सोशल मीडिया में खुद को मजबूत किया। निकायों में एल्डरमेन नियुक्त करने के लिए इनके पास यही आधार बना हुआ है। उनका दावा है कि बड़े नेताओं से सीधा संपर्क होने पर लाभ तो मिलेगा ही।
