साय कैबिनेट के 2 बड़े फैसले, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर होगी भर्ती

Raipur । छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई है। राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के रिक्त 36 पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। इसके साथ ही ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। सरकार के इन फैसलों को राज्य की भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर होगी भर्ती
साय कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। इसके तहत गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 रिक्त पदों पर पूर्व अग्निवीरों की भर्ती की अनुमति दी गई है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान कर चुकी है। इस फैसले से सेना में सेवा दे चुके युवाओं को राज्य पुलिस में रोजगार पाने का अवसर मिल सकेगा।
भर्ती से संबंधित पात्रता, चयन प्रक्रिया, आवेदन की तारीख और अन्य शर्तों की जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध होने पर स्पष्ट होगी।
आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर होगा जनजातीय कार्य विभाग
कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत वर्तमान ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।
इस बदलाव के बाद विभाग का आधिकारिक नाम जनजातीय कार्य विभाग होगा। हालांकि, विभाग के नाम परिवर्तन से संबंधित विस्तृत प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रभावी होने की तारीख की जानकारी आधिकारिक आदेश के अनुसार स्पष्ट होगी।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से की चर्चा
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान शासन व्यवस्था में हुए बदलावों और विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए सुशासन के प्रयोगों, तकनीक के उपयोग और जनसंवाद की व्यवस्था पर भी चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात में शुरू हुए कई प्रशासनिक प्रयोगों से छत्तीसगढ़ को भी सीखने का अवसर मिला। उन्होंने राज्य में चिंतन शिविर की परंपरा, परियोजनाओं की निगरानी और तकनीक आधारित योजनाओं के उपयोग का उल्लेख किया।
पीएम गतिशक्ति से गांवों की मैपिंग और परियोजनाओं की निगरानी
मुख्यमंत्री के अनुसार, पीएम गतिशक्ति योजना ने परियोजनाओं की योजना बनाने और उनकी निगरानी में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। छत्तीसगढ़ के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांवों को जियो-रेफरेंस्ड किया जा चुका है।
इस प्रक्रिया से विकास कार्यों की योजना बनाने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और परियोजनाओं की निगरानी में सहायता मिलने की उम्मीद है।
निवेश आकर्षित करने के लिए किए गए प्रशासनिक सुधार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ के माध्यम से औद्योगिक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने और निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने की बात कही गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, दो जनविश्वास अधिनियमों के जरिए 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे संचालन की अनुमति दी गई है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
डिजिटल सुविधाओं से आम नागरिकों को लाभ
मुख्यमंत्री ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने जनधन-आधार-मोबाइल व्यवस्था, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और यूपीआई को वित्तीय समावेशन तथा डिजिटल भुगतान के महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टैक के तहत 42 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं, ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से 7.51 लाख ग्रामीणों को संपत्ति संबंधी अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराए गए हैं।
