फ्रीज हुआ नाम, छिन गया निशान: 72 घंटे तक लगते रहे झटके, ममता बनर्जी के इम्तिहान की पूरी इनसाइड स्टोरी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कभी अजेय मानी जाने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पिछले 72 घंटों में असामान्य उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। पार्टी की पहचान, नेतृत्व और संगठनात्मक एकता पर सवाल उठे हैं।
दिन 1: चुनाव आयोग ने फ्रीज किया नाम और सिंबल
चुनाव आयोग ने ममता गुट और अरुप रॉय के विरोधी गुट के बीच विवाद के चलते टीएमसी का पारंपरिक नाम और फूल वाला सिंबल फ्रीज कर दिया।
यह तकनीकी झटका तो था ही, लेकिन पार्टी की चुनावी पहचान के लिए बड़ा आघात भी साबित हुआ। विधानसभा चुनाव में बीजेपी से हार के बाद पार्टी पहले ही विद्रोह और विभाजन के खतरे से जूझ रही थी।
दिन 2: नया नाम-सिंबल और नंदीग्राम में झटका
अगले दिन चुनाव आयोग ने ममता गुट को ‘फुटबॉलर’ सिंबल और ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया। विरोधी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल मिला।
इसी दिन नंदीग्राम में टीएमसी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने बीजेपी नेता और नंदीग्राम से ममता को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया।
इसके बाद ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया और कांग्रेस को बहन पार्टी बताया। लेकिन कुछ घंटों बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया। ममता गुट ने बीजेपी सरकार पर दमन का आरोप लगाया।
