ममता ने हाथ से बनाया था ‘जोड़ा घास फूल’ का निशान, इंदिरा गांधी के पुराने केस से क्यों जुड़ा EC का फैसला?

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ से ममता बनर्जी का पुराना जुड़ाव रहा है। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाने के समय ममता ने खुद इस प्रतीक की रूपरेखा हाथ से तैयार की थी।

टीएमसी का चुनाव चिह्न

दो फूलों को एक ही डंठल और जड़ से जुड़ा दिखाने वाले इस प्रतीक को पार्टी की एकता के विचार से जोड़ा गया था। अब करीब 28 वर्ष बाद चुनाव आयोग ने तृणमूल के नाम और इसी चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप फ्रीज यानी इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दिया है। आयोग के इस कदम के बाद मौजूदा विवाद की तुलना 1969 के कांग्रेस विभाजन और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े चुनाव चिह्न विवाद से की जा रही है।

दो गुटों के दावे के बीच चिह्न हुआ फ्रीज

गुरुवार शाम में पार्टी का नाम व चिन्ह फ्रीज होने के बाद देर रात ममता बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग को ईमेल के जरिये नए पार्टी नामों और उपलब्ध चुनाव चिह्नों की अपनी पसंद भेजी। दूसरे गुट ने भी अपनी पसंद आयोग को भेजी। इसके बाद आयोग ने दोनों पक्षों के बीच मूल पार्टी और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय होने तक ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम तथा ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। फिलहाल ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है, जबकि अरूप राय और ऋतव्रत बनर्जी के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। ये व्यवस्थाएं 6 अक्टूबर को राज्य की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए लागू हैं।

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