कही-सुनी (30 AUG-26) : रवि भोई

कौन होगा छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष ?

चर्चा है कि अस्वस्थ चल रहे छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव की जगह किसी नए नेता को कमान सौंपने का फैसला बीजेपी हाईकमान ने कर लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गुरुवार को कुछ घंटों के लिए नई दिल्ली गए थे। बताते हैं उनकी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाक़ात हुई। खबरों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए करीब दो घंटे चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव पिछले दिनों एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए और उनका इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। कहते हैं किरण सिंह देव को स्वस्थ होने में अभी कुछ महीने लगेंगे, ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति जरुरी है। नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का नाम चर्चा में हैं। तोखन साहू ओबीसी हैं और साहू समाज से हैं। राज्य में साहू समाज का करीब 12 फीसदी वोट है। तोखन साहू को छत्तीसगढ़ बीजेपी की जिम्मेदारी दिए जाने की स्थिति में राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है। संतोष पांडे दूसरी बार के सांसद हैं। दुर्ग के सांसद विजय बघेल भी दूसरी बार के सांसद हैं और ओबीसी भी हैं, पर राज्य सत्ता से विजय बघेल का संबंध मधुर नहीं है। आठ बार के विधायक और संयुक्त मध्यप्रदेश में सुंदरलाल पटवा के मंत्रिमंडल से लेकर डॉ रमनसिंह और विष्णुदेव साय के कैबिनेट में रहे बृजमोहन अग्रवाल भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाने की दौड़ में हैं। उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में जल्दी ही फेरबदल होने वाला है।

मुराद पूरी नहीं हुई भाजपा नेता की

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक भाजपा नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में बड़े पोजीशन में जाने के इच्छुक थे। इसके लिए भाजपा नेता ने नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली में एक-दो कार्यक्रम भी करवाए और अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश भी की, लेकिन टीम बनी तो उन्हें निराशा हाथ लगी। नितिन नवीन ने छत्तीसगढ़ से अपनी टीम में रूपकुमारी चौधरी और दीपक म्हस्के को ले लिया। कहा जा रहा है कि दिल्ली जाने के इच्छुक भाजपा नेता को नितिन नवीन की सिफारिश पर सरकार में एक पद भी मिला हुआ है। इस कारण नेताजी को नितिन नवीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने पर उनकी टीम में जगह मिलने का मुगालता हो गया था। पर जब दिन फिरते हैं तो हर चीज के नतीजे उलटे आने लगते हैं। यही नेताजी के साथ हो गया। चर्चा है कि नेताजी अपने सोशल मीडिया अकाउंट में प्रचार को लेकर कुछ लोगों के निशाने पर आ गए। 

बड़े आईपीएस पीएचक्यू से बाहर

हाल के फेरबदल में डीजीपी की दौड़ में शामिल सभी बड़े आईपीएस अफसर पुलिस मुख्यालय से बाहर कर दिए गए। बिना प्रभार के चल रहे 1994 बैच के आईपीएस जीपी सिंह को डीजी प्रशिक्षण बनाकर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी भेज दिया गया। कहते हैं जीपी सिंह की इच्छा ईओडब्ल्यू में डीजी बनने की थी। जीपी सिंह पहले ईओडब्ल्यू के प्रभारी रह चुके हैं। पुलिस मुख्यालय में प्रशासन देख रहे आईपीएस एस आर पी कल्लूरी को पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन का एमडी बना दिया गया। एस आर पी कल्लूरी भी 1994 बैच के आईपीएस हैं। 1994 बैच के आईपीएस हिमांशु गुप्ता डीजी जेल के तौर पर पहले से ही पुलिस मुख्यालय से बाहर हैं। कई वर्षों से पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के प्रभारी रहे पवन देव को होमगार्ड का डीजी बना दिया गया। अभी तक होमगार्ड के डीजी का प्रभार अतिरिक्त रूप से डीजी अरुणदेव गौतम संभाल रहे थे। पवन देव 1992 बैच के आईपीएस हैं। पुलिस मुख्यालय के फेरबदल में आईपीएस विवेकानंद,अमित कुमार और प्रदीप गुप्ता का कद बढ़ाया गया।

ओएसडी के जिम्मे विभाग

कहते हैं विष्णुदेव साय के एक मंत्री ने अपना एक विभाग एक ओएसडी के हवाले कर दिया है। मंत्री जी के पास तीन-चार विभाग हैं। चर्चा है कि ओएसडी साहब अफसरों की पोस्टिंग से लेकर नीतिगत निर्णय तक लेते हैं। मंत्री जी पहले भी अपना एक विभाग एक ओएसडी के भरोसे छोड़ दिया था। हल्ला होने के बाद मंत्री से वह विभाग छिन गया। विभाग जाने के कुछ दिनों बाद ओएसडी भी रवाना हो गए। अब नए ओएसडी साहब आए हैं। उनके जिम्मे एक बड़ा विभाग है। मंत्री जी अनुभवी और पुराने खिलाड़ी हैं, लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि सत्ता को काफी नजदीक से समझने के बाद भी उनका एक विभाग ओएसडी के हवाले क्यों है। मंत्री जी को भाजपा की राजनीति में लंबी रेस का घोड़ा भी माना जा रहा है।

आईएएस के भाई की तूती

कहते हैं कि एक आईएएस अफसर के भाई की एक निगम में इन दिनों तूती बोल रही है। अफसर इस निगम के कर्ताधर्ता हैं। बताते हैं अफसर अपने भाई के मार्फ़त ही काम करते हैं। भाई ठेकेदारों से संपर्क करता है और उनकी पसंद का काम दिलाता है। वैसे एक जमाने में इस निगम में काफी काम थे और यह चर्चा में भी था। पर निगम में इन दिनों पहले जैसी रौनक बची नहीं। ठेकेदार रूचि नहीं ले रहे हैं। अब भाई के मार्फ़त कुछ डील हो जाते हैं।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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