बैक को जारी चेक हुआ बाउंस, आरोपी को सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा

कोरबा 17 अगस्त। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा जमनीपाली द्वारा प्रस्तुत चेक अनादरण के प्रकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा कुमारी कुमुदनी गर्ग ने महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त संतोष यादव को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अपराध में दोषसिद्ध किया है।
प्रकरण में अभियुक्त द्वारा अपने ऋण दायित्व के निर्वहन के लिए 1,96,162 रुपए का चेक जारी किया गया था, जो बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण अनादरित हो गया। इसके पश्चात बैंक की ओर से अभियुक्त को विधिक मांग सूचना पत्र प्रेषित किया गया, लेकिन निर्धारित अवधि में चेक की राशि का भुगतान नहीं किया गया।विचारण के दौरान न्यायालय ने परिवादी बैंक द्वारा प्रस्तुत ऋण खाता विवरण, मूल चेक, चेक रिटर्न मेमो, विधिक सूचना पत्र एवं डाक संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त अपने पक्ष में उत्पन्न विधिक उपधारणा का खंडन करने में असफल रहा तथा परिवादी बैंक अपने मामले को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा। न्यायालय ने अभियुक्त संतोष यादव को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। इसके अतिरिक्त परिवादी को हुई मानसिक एवं आर्थिक क्षति, ब्याज एवं अन्य व्यय को दृष्टिगत रखते हुए 2,20,000 रुपए (दो लाख बीस हजार रुपये) अर्थदण्डध्प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश दिया गया है। न्यायालय ने अपने आदेश के पैरा 42 में अभियुक्त द्वारा पूर्व में प्रस्तुत किए गए जमानत मुचलकों को निरस्त कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह द्वारा न्यायालय के समक्ष बैंक के पक्ष को प्रभावी, तथ्यपरक एवं विधिसम्मत तरीके से प्रस्तुत करते हुए लगातार प्रभावी पैरवी की जा रही है। उनके द्वारा बैंक के हितों से संबंधित प्रकरणों में साक्ष्यों, दस्तावेजों एवं विधिक प्रावधानों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लगातार बैंक के पक्ष में निर्णय प्राप्त हो रहे हैं। प्रस्तुत निर्णय भी उनकी प्रभावी पैरवी एवं विधिक प्रस्तुतियों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
