जिले के दूरस्थ वनांचल ग्राम केंदई, जलके और अड़सरा के पंडो पारा में उल्लास के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस

कोरबी-चोटिया । जिले के सुदूर वनांचल एवं पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत जलके, केंदई और ग्राम अडसरा के पंडो पारा में 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम ‘राज मेरू संस्था’ के मार्गदर्शन एवं ‘वंचितों का सांसद जन संगठन’ के संयुक्त तत्त्वावधान में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।बिरसा मुंडा एवं भगवान गणेश की पूजा-अर्चना से हुआ शुभारंभकार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ क्षेत्र के ग्रामीणों और सहयोगी साथियों के कर-कमलों द्वारा किया गया।
उपस्थित सभी लोगों ने जनजातीय नायक जननायक बिरसा मुंडा एवं भगवान श्री गणेश की प्रतिमा पर अक्षत, पुष्प, जल और अगरबत्तीअर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं जल-जंगल-जमीन की रक्षा की कामना की। प्रकृति पूजा ही आदिवासी संस्कृति का मूल आधार: सीताराम पंडोपूजा-अर्चना के पश्चात जन संगठन के अध्यक्ष सीताराम पंडो ने सभी उपस्थित ग्रामीणों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।
अपने उद्बोधन में उन्होंने आदिवासी परंपरा और जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा: ‘आदिवासी समाज आदिकाल से ही प्रकृति का संरक्षक रहा है। आदिवासी नदियों को अपनी मां, धरती की मिट्टी को अपनी जन्मदात्री और ऊंचे पहाड़ों व घने पेड़ों को अपना आराध्य देवता मानकर उनकी पूजा करते आए हैं। करमा और सुआ नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत के अमूल्य अंग हैं। ‘उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा से अपना मार्ग स्वयं बनाया है और आज भी स्वाभिमान व अधिकारों के लिए संघर्ष की राह पर अग्रसर है। 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ और 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है। यह गौरव हमें भगवान बिरसा मुंडा और अनगिनत आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से प्राप्त हुआ है। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी।युवाओं से नशा मुक्ति और शिक्षा का संकल्प लेने का आह्वानअध्यक्ष सीताराम पंडो ने समाज में व्याप्त नशाखोरी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युवा ही किसी समाज और परिवार की असली ताकत होते हैं, लेकिन आज का युवा नशे की लत में फंसकर अपना भविष्य बिगाड़ रहा है, जिसकी रक्षा करना पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।उन्होंने युवाओं और ग्रामीणों से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर संकल्प लेने की अपील की:नशा उन्मूलन का संकल्प: सबसे पहले युवाओं को नशा त्यागने का दृढ़ संकल्प लेना होगा। अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाकर ही समाज का कल्याण संभव है।
शिक्षा की अनिवार्यता: शिक्षा ही वह एकमात्र हथियार है जो हमारी दुनिया और सोच को बदल सकती है। शिक्षित होकर व्यक्ति अपने भीतर के विवेक को जाग्रत करता है, और विवेक ही इंसान को सही मायनों में बलवान बनाता है। संस्कृति और विरासत का सम्मान: आधुनिकता के दौर में भी युवाओं को अपनी मूल संस्कृति, सभ्यता और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े रहना चाहिए।अधिकारों के लिए एकजुटता: आदिवासी समाज एकजुट होकर अपने हितों और मूलभूत आवश्यकताओं के लिए सरकार के समक्ष अपनी मांगें मजबूती से रखे।प्रेरणा और मार्गदर्शन: समाज के जिन लोगों ने अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, उनसे प्रेरणा लेकर अन्य युवाओं को भी आगे बढऩा चाहिए। आज समाज को पुन: बिरसा मुंडा जैसे दूरदर्शी और साहसी महापुरुषों की विचारों की आवश्यकता है।
पौधारोपण और फलदार पौधों का वितरण पर्यावरण संरक्षण की प्राचीन आदिवासी परंपरा को सहेजते हुए कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित ग्रामीणों और बच्चों को आम, अमरूद, कटहल और मीठा नीम (कढ़ी पत्ता) के पौधे वितरित किए गए।इसके पश्चात, जन संगठन के सदस्यों और ग्रामीणों ने मिलकर नवनिर्मित शाला भवन परिसर के चारों ओर उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया और उन पौधों की सुरक्षा का संकल्प लिया।इस गरिमामय कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जन संगठन के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
