बुनियादी समस्याओं को लेकर शुक्लाखार में ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

कोरबा 07 अगस्त। बारिश के मौसम में भी लोगों ने अपनी इच्छाशक्ति दिखाते हुए बुनियादी मसले को लेकर बांकीमोंगरा के शुक्लाखार में चक्काजाम कर दिया। खास बात यह रही कि पुरुषों से कहीं ज्यादा संख्या महिलाओं की रही। जर्जर सडक से हो रही परेशानी को उन्होंने मुद्दा बनाया। चक्काजाम के दौरान हालात काबू में रहे, यह देखते हुए बांकीमोंगरा पुलिस ने यहां पर सुरक्षा साधनों के साथ डेरा डाला।
प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण पुरुष और महिलाओं की भागीदारी रही। शुक्रवार को सुबह से इस इलाके में बारिश का दौर जारी रहा। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने पहले से सडक की बदहाली और एक पुलिया का निर्माण एक साल बाद भी नहीं कराए जाने को लेकर अल्टीमेटम दे दिया था। किसी स्तर पर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। आखिरकार संगठन के पदाधिकारियों के नेतृत्व में परेशान लोग मौके पर पहुंचे और जाम लगा दिया। इससे कोरबा, जवाली और कटघोरा की तरफ जाने वाली गाडियों के पहिए थम गए। प्रदर्शन को प्रभावी बनाने के लिए संगठन के द्वारा कई चारपहिया गाडियों को सडक पर आड़ा रख दिया गया ताकि कोई भी दूसरी दिशा की तरफ मूवमेंट न कर सके। सुबह 9 बजे से शुरू हुई चक्काजाम के कारण व्यस्त मार्ग में कुछ ही देर में छोटे-बड़े वाहनों की लंबी लाइन लग गई। इनमें से कई वाहन रूटिन के थे और कुछ आवश्यक सेवाओं के। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि हमारे क्षेत्र की सडक एक वर्ष से भी अधिक समय से बदहाल स्थिति में है। हाल दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी मार्ग पर एक नाला का पुल एक वर्ष पहले क्षतिग्रस्त हो गया था। उसे बेहतर करने के लिए न तो नेताओं ने ध्यान दिया और न ही अधिकारियों ने। इसलिए उनके कान खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। चक्काजाम की खबर होने पर थाना प्रभारी जितेंद्र यादव पुलिस बल के साथ यहां पहुंचे और उन्होंने मामले पर नजर रखी। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान हालात काबू में रहे।
बांकीमोंगरा क्षेत्र में कोलारनाला पर बनाया गया पुल पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हो गया था। यहां पर आंशिक सुधार कराने के साथ इसे छोड़ दिया गया। मौजूदा स्थिति में मौके पर फिसलन की स्थिति बनी हुई है। मिट्टी को डंप करने के कारण हालात खरतनाक हो गए हैं। थोड़ी सी लापरवाही अनहोनी का कारण बन सकती है। बारिश के मौसम में पुल के नीचे पानी की मात्रा के आधार पर लोग यहां से आना जाना कर रहे हैं जबकि ज्यादा पानी बरसने पर उन्हें दीपका होते हुए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों का अतिरिक्त समय जाया हो रहा है और रूपया भी। मानसिक परेशानी हो रही है सो अतिरिक्त। इसलीए ग्रामीणों ने प्रशासन को अपनी मांगे मनवाने के लिए सडक का रास्ता चुना है। दोपहर 1.00 बजे तक चक्काजाम जारी था। हालाकि अधिकारियों ने संवाद कर रास्ता निकालने की बात कही है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि कोरबा जिले में डीएमएफ के हजार करोड़ के फंड के जरिए कई प्रकार की सुविधाएं शहर और ग्रामीण क्षेत्र को उपलब्ध कराई जा रही है। इसलिए इस क्षेत्र के अभाव को दूर करने के लिए ध्यान देना होगा।
