कही-सुनी 26 JULY-26 : रवि भोई

रिटायर्ड लोगों के भरोसे छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड

छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड राज्य का कमाऊ उपक्रम है और जनता से सीधा वास्ता रखने वाला भी। सरकार ने इस बोर्ड को रिटायर्ड लोगों के हवाले कर दिया है। छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड के अधीन तीन कंपनियां हैं, तीनों ही कंपनियों के प्रबंध संचालक सेवावृद्धि पर चल रहे हैं। कहते हैं इनको एक बार-दो बार सेवावृद्धि नहीं मिली, बल्कि तीन-चार बार सेवावृद्धि मिल चुकी है। ऐसा लग रहा है बिजली बोर्ड में कंपनी के एमडी बनने लायक अफसर ही नहीं हैं। बताते हैं जेनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार चौथी बार जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें दो बार एक्सटेंशन मिल चुका है। बिजली बोर्ड में रिटायरमेंट की उम्र 62 वर्ष है। बताते हैं संजीव कुमार कटियार साहब कांग्रेस के जमाने से इस पद पर जमे हुए हैं। वे भूपेश बघेल की सरकार में भी एक बार एक्सटेंशन ले चुके हैं और विष्णुदेव साय की सरकार में भी बल्ले-बल्ले है। ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला भी रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी मेहमान बने हुए हैं। कहते हैं शुक्ला साहब सेवावृद्धि पर चल रहे थे और रिटायरमेंट की उम्र को छूने के बाद फिर कृपा बरस गई। वितरण कंपनी के एमडी भीमसिंह कंवर पर भी सरकार मेहरबान है। खबर है कि भीमसिंह को तीसरी बार एक्सटेंशन मिला हुआ है। बिजली बोर्ड का घाटा पूरा करने के लिए सरकार एक तरफ बिजली की दरें बढाकर जनता पर बोझ डाल रही है। दूसरी तरफ नए खून को मौका देने की जगह पुराने लोगों से गाड़ी खींच रही है।

महिला पार्षद की ऊँची उड़ान

कहते हैं भाजपा की एक महिला पार्षद रायपुर से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है और उनके आसपास रहने वाले लोगों के सामने खुले तौर पर इच्छा जाहिर कर दी है। भाजपा की आंधी में रायपुर नगर निगम की पार्षद बनी महिला नेत्री की वार्ड चुनाव में हवाई लैंडिग हुई। छत्तीसगढ़ भाजपा के एक कर्णधार की कृपा से चुनाव से टिकट मिल गया और किस्मत ने साथ दिया और चुनाव जीत गई। जबकि उस वार्ड से चुनाव लड़ने के भाजपा के एक कार्यकर्ता सालों से मेहनत कर रहा था। चर्चा है कि एक भाजपा विधायक ने महिला पार्षद को हवा में नहीं उड़ने की सलाह दी और जमीन में रहने की नसीहत दी। बताते हैं विधायक जी ने महिला पार्षद से कहा-सालों के संघर्ष के बाद पार्टी की उन पर कृपा हुई। विधायक जी द्वारा महिला पार्षद को दी गई नसीहत पार्टी के भीतर खूब चर्चा में है। कहा जाता है वार्ड में महिला पार्षद के होर्डिंग्स और पोस्टर ही नजर आते हैं, वह कभी नजर नहीं आती। अब महिला पार्षद मैडम की अपने ही वार्ड में जमीन खिसकती नजर आ रही है, पर वे हैं कि विधानसभा के लिए गोते लगाना शुरू कर दी हैं।

पीए के भरोसे मंत्री जी

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक मंत्री जी अपने पीए पर इतना निर्भर हो गए हैं कि उसकी सलाह के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ते हैं। पीए साहब एक निगम से प्रतिनियुक्ति पर मंत्री जी के स्टाफ में शामिल हुए हैं। बताते हैं पीए साहब बहुत ही कम समय में मंत्री जी के विश्वासपात्र बन गए। सर्वगुणसंपन्न पीए साहब अब मंत्री जी के आंख-कान बने हुए हैं। सुनने में आता है कि पीए बड़ा कलाकार है। मंत्री जी के नाम पर अपना उल्लू सीधा तो करता ही है। वह मंत्री जी को उलटा-सीधा पाठ भी पढ़ाता है। वैसे मंत्रिमंडल में फेरबदल की अफवाह के बीच मंत्री जी को हटाए जाने की चर्चा चल पड़ती है। पर अभी तो पीए साहब मंत्री जी की लाठी बने हुए हैं।

तंगी में प्राइवेट अस्पताल मालिक

चर्चा है हाल ही में बड़े तामझाम के साथ छत्तीसगढ़ की राजधानी में खोले गए एक प्राइवेट अस्पताल मालिक का भूत उतर गया है। कहते हैं कि अस्पताल मालिक जिस उम्मीद के साथ अस्पताल खोले थे,वह उम्मीद पूरी नहीं हो पा रही है। आमदनी कम और खर्च ज्यादा हो रहा है। भारी प्रचार-प्रसार के बाद भी अस्पताल में मरीज कम ही आ रहे हैं। इस कारण अस्पताल की आर्थिक स्थिति पटरी से उतरने लगी है और उसके मालिक को बाजार से धन उधार में लेना पड़ रहा है। इस अस्पताल में कुछ ब्यूरोक्रेट और राजनेताओं के पैसे लगे हैं। अब देखते हैं अस्पताल चलाने के लिए मालिक को बाजार से कितना धन मिल पाता है और उधार के धन से कितने दिन गाडी चलती है।

सचिव के नाम उगाही

चर्चा है कि एक निर्माण विभाग के सचिव के नाम से राज्य में उगाही का खेल चल रहा है। कहते हैं सचिव के परिचित या दोस्त बताकर कुछ लोग निर्माण विभाग के अफसरों के दफ्तर में जाकर धौंस जमाते हैं। वे कहते हैं सचिव साहब ने भेजा है। अब किसी अफसर की हिम्मत नहीं कि सचिव महोदय से बात कर उसकी पुष्टि कर लें। कुछ दमदार अफसर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देते हैं, पर कुछ उनकी झोली भर देते हैं। यह खेल आदिवासी और मैदानी इलाकों में चल रहा है। सुनने में आ रहा है कि सरगुजा के अंदरूनी इलाकों में वसूलीबाज ज्यादा सक्रिय हैं। अब सचिव महोदय तक उनके नाम के दुरुपयोग की खबर किसी साहसी अधिकारी ने पहुंचाई या नहीं, इसका पता नहीं चला।

छत्तीसगढ़ के कांग्रेसियों में जगा जोश

चर्चा है कि नीट पेपरलीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सक्रियता के बाद छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं में जोश जग गया। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के आवास के सामने धरने के बाद राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राज्य के नेता सड़क पर आ गए। नीट पेपरलीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए ब्लाक स्तर पर प्रदर्शन किया। कांग्रेसियों के एक्शन के खिलाफ भाजपा ने राजीव भवन का घेराव कर दिया। इससे राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। भाजपा के एक्शन के खिलाफ और कांग्रेस के लोगों से मारपीट का आरोप लगाते कांग्रेसी राजधानी के खम्हारडीह थाने में तकरीबन 19 घंटे जम गए। राहुल गाँधी से इंस्पायर होकर राज्य के कांग्रेसी नेता भी बांहे फड़का रहे हैं। अब देखते हैं यह जोश कितने दिन बना रहता है और राज्य की भाजपा सरकार को कितना हिला पाते हैं।

मंत्रिमंडल में फेरबदल ठंडे बस्ते में ?

नीट पेपरलीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या विष्णुदेव साय मंत्रिमडल में फेरबदल अब लंबे समय के लिए टल गया। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकता अब नीट पेपरलीक मामले में हुए नुकसान की भरपाई करना है। पहले केंद्र सरकार में बदलाव होगा, फिर राज्यों की तरफ नजर दौड़ाई जाएगी, कहा जा रहा है तब तक के लिए छत्तीसगढ़ सुरक्षित जोन में चला गया। नीट पेपरलीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से साफ़ है कि मोदी सरकार छात्रों के सामने झुकी। कहा जा रहा है फेरबदल की संभावना से शंकाओं से घिरे छत्तीसगढ़ के कुछ मंत्री अब कुछ दिन चैन की नींद लेंगे।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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