बुर्कीना ने फ्रांस से संबंध तोड़े @ डॉ. सुधीर सक्सेना

बुर्कीना ने फ्रांस से संबंध तोड़े
• डॉ. सुधीर सक्सेना
पश्चिमी अफ्रीकी राष्ट्र बुर्कीना फासो ने फ्रांस से अपने दौत्य-संबंध तोड़ने का ऐलान किया है। कभी फ्रांस का उपनिवेश रहे बुर्कीना की इस कार्रवाई को बुर्कीना फासो की कठोर कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच यह भी स्पष्ट हो गया है कि बुर्कीना में लोकतंत्र दूर की कौड़ी है और उसे लंबे समय तक फौजी जुंता के अधीन रहना होगा। गत वर्ष के युद्ध में पश्चिमी अफ्रीकी ब्लॉक से संबंध विच्छेद के उपरांत बुर्कीना ने पड़ोसी राष्ट्रों नाइजर और माली के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित कर मस्क्वा-बीजिंग धुरी की ओर पींगे बढ़ाई हैं और हाल में उसकी रूस पर सामरिक निर्भरता बढ़ी है। गौरतलब है कि बुर्कीना, माली और नाइजर पिछले करीब एक दशक इस्लामी उग्रपंथियों की घुसपैठ से जूझ रहे हैं और उनसे मुकाबले के लिये रूसी सहायता पर निर्भर हैं। फ्रांस से इन देशों के रिश्तों में तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है और अब नव उपनिवेशवाद को बढ़ावा देने और बुर्कीना के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ आचरण का आरोप मढ़कर बुर्कीना ने जुमे के रोज़ फ्रांस से राजनयिक संबंध तोड़ लिये हैं।
बुर्कीना फासो छोटा सा अफ्रीकी राष्ट्र है विशालकाय अफ्रीका महाद्वीप में पश्चिमोत्तर में स्थित भू-आवेष्टित 2.47 लाख वर्ग किमी का लगभग 2.4 करोड़ की आबादी का देश। 65 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और वह विश्व के चुनींदा निर्धनतम राष्ट्रों में शुमार है। फ्रांस की औपनिवेशक दासता से मुक्त हुये इसे लगभग कुछ दहाइयां ही बीतीहैं और प्रारंभिक लोकतंत्र के बाद वहां तख्तापलट का इतिहास रहा है। वहां आतंकवादी समूह सक्रिय हैं और आर्थिक विकास के पैमाने पर वह बहुत निचली पायदान पर है। यही बुर्कीना फासो इन दिनों विश्वव्यापी सुर्खियों में है और उसकी सुर्खियों में आने का सबब हैं वहां के 38 वर्षीय युवा राष्ट्रपति इब्राहीम ट्रओरे, जो लगभग चार वर्ष पूर्व कू-दे-ता से सत्ता में आये थे। अपनी रीति और नीति से टूओरे पैन-अफ्रीका या अफ्रीकी-अस्मिता के प्रतीक बनकर उभरे हैं। जाहिर है कि वह योरोप और अमेरिका के धनीमानी राष्ट्रों और निओ-इंपीरियालिस्ट ताकतों की आंखों में किरकिरी बनकर खड़क रहे हैं। बिलाशक अपने दुस्साहसिक फैसलों से उन्होंने अमेरिका और फ्रांस जैसे महाबली राष्ट्रों को चुनौती दे डाली है।
कभी अपर वोल्टा के नाम से ज्ञात बुर्कीना सन 1896 में फ्रांसीसी दासता के जुएं तले आया। सन 1958 में स्वशासन के हक के बाद इसे सन 1960 में आजादी मिली। इसके बाद का इतिहास अस्थिरता, अकाल, दुर्भिक्षों, तखतापलट और भ्रष्टाचार की गाथा है। सन 1966, 80, 83 और 87 तथा फिर सन 2022 में दो बार कूदे तो हुये। तख्तापलट के विफल प्रयास सन 1989, 2015 और 2023 में भी देखने को मिली। इनमें उल्लेखनीय रहा सन 1983 में सत्त में आये थॉमस संकारा का कार्यकाल। संकारा पहले राष्ट्राध्यक्ष थे, जिन्होंने बुर्किना फासो को सुधारों और विकास की राह पर बढ़ाया। सामाजिक-आर्थिक, सुधारों के तहत उन्होंने साक्षरता अभियान, भूमि पुर्नवितरण, 20 लाख से अधिक बच्चों का टीकाकरण, रेल और सड़क निर्माण, सबको शिक्षा जैसी योजनाएं लागू कीं। उन्होंने महिलाओं का खतना, बलात विवाह और बहु विवाह पर पाबंदी लगाई, मगर सन 1987 में ब्लेस कोम्पाओरे के नेतृत्व में सशस्त्र क्रांति में उनका तख्ता पलट कर उनकी हत्या कर दी गयी। ब्लेस की तानाशाही का 31 अक्टूबर 2014 को अंत हुआ, लेकिन उसके बाद बुर्किना अग्रवादी इस्लामी गुटों की घुसपैठ और हिंसा में डूब गया, जिसमें दस लाख से अधिक बुर्कीनाबे विस्थापित हुये।
फ्रेंचकाल में अपर वोल्टा के तौर पर ज्ञात राष्ट्र को बुर्किना फासो नाम थॉमस संकरा की देन है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ईमानदारों की धरती। टूओरे की पहल पर फ्रेंच फौजियों को निष्कासित कर तीनों उक्त देशों के रंगरूटो को कानून और सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया है। हालात का एहसास इससे हो सकता है कि अमेरिका समेत अनेक देशों ने सैलानियों से बुर्कीनो के अंदरूनी भागों की यात्रा नहीं करने को कहा है। देश में यातायात और संचार साधन अत्यल्प हैं। दक्षिण अफ्रीका, माली और घाना के बाद बुर्कीना अफ्रीका का चौथा प्रमुख स्वर्ण उत्पादक राष्ट्र है। सोना, कपास और तिलहन वहां की मुख्य निर्यात वस्तुएं हैं। इनका उत्पादन बढ़ाने के उपक्रमों में तेजी आई है। वैसे बुर्कीनों जवाहरतों का भी निर्यात करता है और वहां के पारंपरिक हस्तशिल्प की विश्व बाजार में अच्छी मांग व प्रतिष्ठा है। टूओरे अब इन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही अधोसंरचना के विकास पर जोर दे रहे हैं।

इसमें शक नहीं संकारा टूओरे के आदर्श हैं और वह उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। संकारा ऐसी शख्सियत थे, जिसने मर्सिडीज की बेड़ा बेचकर सस्ती रेनोल्ट को चुना था। उन्होंने अफसरों के वेतन में कटौती कर उनके प्रथम श्रेणी हवाई टिकट और शोफरों के पर पाबंदी लगा दी थी। वह विदेशी वित्त के विरोधी थे और कहते थे कि ही हू फीड्स यू, कंट्रोल्स यू। अफ्रीका केचेक्वेरा कहे गये संकारा अफ्रीकी राष्ट्रों की एकजुटता चाहते थे, ताकि अफ्रीका का उद्धार हो और वह पश्चिम की गुलामी से मुक्त हो। उन्हें क्यूबा का मॉडेल पसंद था। उन्होंने राजधानी क्बागादोगू में फौज के प्रोवीजन स्टोर को जनसामान्य के लिए देश के पहले सुपर मार्केट में तब्दील कर दिया था। उनके दफ्तर में एयर कंडीशनर नहीं था और वह सिर्फ 450 डालर वेतन लेते थे। उनके पास सिर्फ एक कार, चार बाइक, तीन गिटार, एक रेफ्रीजरेटर और एक टूटा फ्रीजर था। वह कुशल गिटारवादक थे। बिना अंगरक्षकों के वह जॉगिंग पर निकल जाते थे। बुर्कीना का राष्ट्रगीत उन्होंने ही लिखा था। सार्वजनिक दफ्तरों में अपना चित्र नहीं लटकाने पर पूछे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा था कि हमारे यहां सात मिलियन संकारा हैं।
आज पूरा बुर्कीना उन्हीं संकारा को याद कर रहा है। सन 2019 में राजधानी में उसी ठोर उनकी प्रतिमा लगी, जहां उनकी हत्या हुई थी। मुखाकृति नहीं मिलने से अगले वर्ष नयी प्रतिमा स्थापित की गयी। टूओरे के सत्ता में आने के बाद सन 2023 में उन्हें ‘हीरो ऑफ द नेशन’ घोषित किया गया। अक्टूबर सन 2023 में ही राजधानी के बुल्वार चार्ल्स द गाल का नाम बदलकर बुल्वार कैप्टेन थॉमस संकारा कर दिया गया। इस बीच क्यूबा ने संकारा को अपने सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ जोसे मार्टीं से विभूषित किया।
उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात की बुर्कीना में सौ मस्जिदें बनाने की पेशकश यह कहकर ठुकरा दी है कि हमें मस्जिदों की नहीं, वरन स्कूल-कालेजों, अस्पतालों और कल कारखानों की जरूरत है। इसमें शक नहीं कि युवा टूओरे संकारा के जूतों में पांब डाल चुके हैं।
घटनाक्रम से स्पष्ट है कि बुर्कीना का ताजा कदम फ्रांस, अमेरिका और योरोपीय देशों को पसन्द नहीं आयेगा। फ्रेंच सैनिक टुकड़ियों को इलाके से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है। यह भी साफ है कि बुर्कीना में लोकतंत्र की बहाली के कोई आसार नहीं हैं।
टओरे ने दो टूक कह दिया है कि लोकतंत्र हमारे लिये नहीं है। डेमोक्रैसी इज नॉट फार अस। लीबिया का उदाहरण देते हुये उन्होंने कहा कि अफ्रीकी राष्ट्रों में लोकतंत्र की स्थापना का अर्थ है रक्तपात। हमारा रास्ता अलग है और हमें सुदृढ़ आर्थिकी, अधिक मेहनत और मजबूत फौज की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि जुंता ने सन 2024 में लोकतंत्र की बहाली का वायदा किया था, किंतु जनवरी, सन 24 से सभी राजनीतिक दलों को भंग कर उसने आगामी पांच वर्षों के लिये सत्ता पर फौज के काबिज रहने का ऐलान कर दिया। इस बीच पश्चिमी सूत्रों ने बुर्कीना में जुंता काल में करीब 1800 निर्दोष नागरिकों के मारे जाने का आरोप लगाया है, जिसका जुंता ने खंडन किया है।
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