हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए मिलकर काम करेंगे भारत और जापान

नई दिल्ली. दुनिया में उथल-पुथल के मौजूदा दौर में भारत और जापान आर्थिक व ऊर्जा सुरक्षा, एआइ व सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीकों और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए मिलकर काम करेंगे। भारत दौरे पर आईं जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शिखर वार्ता में इस पर सहमति बनी।

भारत के पुराने मित्र जापान की पीएम को मोदी ने छोटी बहन कहा तो ताकाइची ने भी इस पर खुशी जताते हुए कहा कि दोनों भाई-बहन मिलकर अपने देशों को मजबूत बनाएंगे। यहां हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच तथा प्रतिनिधिमंडलस्तरीय बातचीत के दौरान आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। बातचीत के बाद साझा प्रेस वार्ता में मोदी ने कहा कि अगले दशक में जापान से 10 ट्रिलियन येन का निवेश आकर्षित करने के लिए भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य है। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने पर भी जोर दिया। मोदी ने कहा कि एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत दोनों लोकतंत्रों के लिए एक साझा प्राथमिकता है। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों में स्थानीय करेंसी में व्यापार करने पर भी चर्चा हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। शिखर वार्ता के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री कहा कि वार्ता आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रही। क्रिटिकल मिनरल में जापान के साथ सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी।

भारत-जापान व्यापार समझौते की समीक्षा होगीः भारत और जापान

यह दोनों देशों के बीच 2011 में हुए व्यापार समझौते (सिपा) की समीक्षा पर सहमत हो गए है। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने बताया कि गुरुवार को शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने यह प्रस्ताव रखा, जिस पर जापान की पीएम ने भी सहमति व्यक्त की। मिस्त्री ने कहा कि सिपा के बावजूद भारत के निर्यात में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। इससे हम समझौते के कुछ प्रावधानों में बदलाव चाहते हैं। दोनों देशों के अधिकारी आने वाले दिनों में इस पर आगे की बातचीत शुरू करेंगे। मोदी ने कहा कि आज के वैश्विक उथल-पुथल भरे माहौल में आपसी विश्वास हमारी सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है। जापानी पीएम की यह यात्रा भारत जापान रणनीतिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत है।

भारत-जापान पूरकः भारत और जापान की अर्थव्यवस्था एक दूसरे की पूरक हैं। सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक तकनीक तक हमारी सोच और अप्रोच में भी समानता है। हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी है। एक सशक्त और समृद्ध जापान का आपका विजन और विकसित भारत का हमारा संकल्प पूरे विश्व की प्रगति को मिलकर साकार करेंगे। नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

दोनों को देशों को मजबूत बनाएंगे -सनाए ताकाइची, प्रधानमंत्री आपने मुझे एक सुंदर छोटी बहन कहा, बड़ी बैठ बैठक से पहले हुई छोटी-सी बैठक में हम एकमत हैं और भाई-बहन के रूप में इस रिश्ते को आगे बढ़ाएंगे। जापान और भारत को अपनी-अपनी शक्तियों का लाभ उठाकर एक साथ मजबूत और समृद्ध बनना चाहिए।

समझौते और सहयोग के वायदे

रक्षा क्षेत्र में पहली संयुक्त परियोजनाः नेवल रेडियो एंटीना बनेंगे, दोनों देशों के बीच संयुक्त नौसेना अभ्यास।

फार्मा, मेडिकल उपकरण और बायोटक क्षेत्र में समझौतेः सस्ती, विश्वसनीय व अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं।

दोनों देशों की वित्तीय एजेंसियों के बीच समझौतेः पूंजी व निवेश की राह आसान होगी।

अगले 10 साल में 10 ट्रिलियन येन (5.92 लाख करोड़ रुपए) के भारत में निवेश और जापानी कपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य।

आर्थिक सुरक्षा के संयुक्त रोडमैपः एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम और एडवांस मटीरियल से रणनीतिक सप्लाई चेन में मजबूती के लिए काम

ऊर्जा सुरक्षाः इंडो-जापान बायोगैस इनिशिएटिव से भारत में 1000 बायोगैस और ऑर्गेनिक खाद संयंत्र लगाने में सहायता। साथ बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा समेत हरित ऊर्जा में मिलकर काम।

मोबिलिटी पार्टनरशिपः ऑटोमेटिव क्षेत्र में सफलता के बाद शिप-बिल्डिंग, ऐवीऐशन और लोजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम।

नागरिकों में संपर्कः दोनों देशों के नागरिकों में पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम बढ़ेंगे, शोध, शिक्षा व स्टार्ट अप में सहयोग।

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