सरकार ने कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड में बड़ा बदलाव किया

कोरबा 02 जुलाई। सरकार ने कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड में बड़ा बदलाव किया है। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि कानूनी वेतन सीमा (जो अभी 15,000 रुपये प्रति माह है) तक 12′ का योगदान अनिवार्य है। ईपीएफओ ने पीएफ में ‘एलिजिबल बैलेंस’ (जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा शामिल है) का 100′ तक एडवांस निकालने की मंजूरी भी दे दी है। हालांकि, अब सदस्यों को अपने अकाउंट में कॉन्ट्रिब्यूशन का 25′ हिस्सा मिनिमम बैलेंस के तौर पर बनाए रखना होगा। औद्योगिक जिला कोरबा के संदर्भ में पीएफ से जुड़े मामले में कर्मियों के हितों को कुछ मजबूती मिलने की आस जगी है।

ईपीएफओ ने आगे कहा कि इससे ज्यादा कोई भी योगदान स्वैच्छिक (अपनी मर्जी से किया गया) माना जाएगा। भले ही आपकी बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये प्रति माह हो, आपके पीएफ योगदान के तौर पर 1,800 रुपये काटे जाएंगे। साथ ही एम्प्लॉयर (नियोक्ता) भी उतना ही योगदान देगा। हालांकि, आपके पास बची हुई सैलरी में से कुछ हिस्सा रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए जमा करने का विकल्प भी होगा। सरकार की ओर से हाल में ही जारी की गई एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026 के प्रावधानों के अनुसार कोई कर्मचारी कानूनी वेतन सीमा से ज्यादा वेतन पर कानूनी दर या उससे ज्यादा किसी भी दर पर स्वैच्छिक आधार पर अतिरिक्त योगदान देने का विकल्प चुन सकता है। नियोजक के पास इन अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदानों के बराबर योगदान देने का विकल्प है। यह कोई मजबूरी नहीं है। कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों ही किसी भी समय ऐसे अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान को कम या बंद कर सकते हैं।

13 श्रेणियों को किया तीन
ईपीएफओ ने पैसे निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाया है और कैटेगरीज को 13 से घटाकर सिर्फ 3 कर दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि इस स्कीम में जो लचीलापन लाया गया है, उसका मकसद योगदान देने वाले सदस्यों को उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए ज्यादा आजादी देना है। इन प्रावधानों पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) की बैठकों में विस्तार से चर्चा की गई है और इन्हें उनकी सहमति से बनाया गया है। साथ ही ये नए लेबर कोड्स के उद्देश्यों के अनुरूप हैं।

वेतन के ढांचे में परिवर्तन संभव
चूंकि प्राइवेट सेक्टर के ज्यादातर कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच कॉस्ट-टू-कंपनी (सीटीसी) वाला रिश्ता होता है इसलिए सैलरी का स्ट्रक्चर बदला जा सकता है। इससे दोनों पक्ष मिलकर ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जो ईपीएफओ सब्सक्राइबर के लिए फायदेमंद हो। हालांकि, कवरेज से जुड़ा नियम वैसा ही रहेगा क्योंकि नई स्कीम में मेंबरशिप जारी रखने का प्रावधान है। इसमें साफ कहा गया है कि जो कर्मचारी पुरानी स्कीम के तहत मेंबर थे, वे मेंबर बने रहेंगे। नई स्कीम में पैसे निकालने (विड्रॉल) से जुड़े उन बदलावों को लागू किया गया है जिन्हें पिछले साल अक्टूबर में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने मंजूरी दी थी। इन बदलावों में एक साल में पैसे निकालने की संख्या बढ़ाना और एडवांस फंड निकालने की कैटेगरी को आसान बनाना शामिल है। कैटेगरीज को 13 से घटाकर सिर्फ तीन कर दिया गया है। इनमें जरूरी जरूरतें (बीमारी, पढ़ाई, शादी) घर से जुड़ी जरूरतें और खास हालात शामिल हैं।

शिकायतें अपार, समाधान शून्य
औद्योगिक जिले कोरबा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन कंपनी, एनटीपीसी और उपक्रमों के अंतर्गत संचालित कई आउटसोर्सिंग कंपनियों के अलावा अनेक संस्थाओं में लंबे समय से कम कर रहे कामगारों के मामले में अभी भी शोषण की समस्या बरकरार है। यह अलग-अलग सेक्टर में जी तोड़ मेहनत करने के साथ दूसरों को खाद्य पानी देने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद वेतन निम्न है और सुविधाएं गायब। श्रम विभाग से लेकर प्रशासन की जानकारी में ऐसे मामले कई बार आए गए हैं जिनमें कहा गया है कि दिखाने के लिए बैंक पेमेंट होता है और बाद में दबाव बनाकर आदि से ज्यादा रकम वापस ले ली जाती है। ऐसे मामलों में कभी भी फिजिकल वेरिफिकेशन से लेकर दूसरे तथ्यों पर गंभीरता दिखाने की जरूरत ना तो सरकार ने समझी ना प्रशासन के अधिकारियों ने। इसलिए मौके पर काम करने वाले व्यवस्था को अपनी नियति समझ बैठे हैं।

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