कोरबा 16 जून। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र ने कहा है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने और आम लोगों की समझ के स्तन को बेहतर करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत किस बात की है कि अपभ्रंश के बजाय सही शब्द खोजे जाए। ऐसा तब हो सकता है जबकि पर्याप्त अध्ययन किया जाए।

कोरबा प्रवास पर पहुंचे प्रभात मिश्र ने औपचारिक चर्चा में इस बात को कहा। काफी समय से साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय प्रभात ने स्वीकार किया कि हिंदी से कहीं ज्यादा समय छत्तीसगढ़ी में उपलब्ध है और बहुत दीर्घकाल से इसका उपयोग होता रहा है। छत्तीसगढ़ के भौगोलिक परिदृश्य में बोली जाने वाली भाषा में किए जाने वाले व्यवहार के दौरान अनेक शब्द जानकारी में आते हैं। वृहद स्तर पर किसी भी भाषा की स्वीकार्यता के लिए एक पक्ष यह भी जरूरी है कि इसे जितना सरलीकृत किया जाएगा, वह अपने प्रभाव को बहुत ज्यादा स्थापित करेगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान साहित्य और इस संबंध रखने वाले क्षेत्र के लोगों से लगातार संवाद हो रहा है। आयोग की ओर से जो सामग्री प्रकाशित कराई गई है वह विद्वतजन तक पहुंचाई जा रही है ताकि छत्तीसगढ़ के शब्दकोश के बारे में ज्ञानवर्धन हो और लोग इसमें और ज्यादा रुचि ले।

उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ी साहित्य पर किए गए शोध कार्य और अन्य प्रकार के प्रयासों की जानकारी भी ली गई है और इस पर बराबर अध्ययन किया जा रहा है। जो वर्ग इस क्षेत्र में गतिशील है , उसे उपयोगी सुझाव देने को कहा गया है। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यों को और बेहतर बनाने में इस तरह के सभी योगदान उपयोगी हो सकते हैं।

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