म्यांमार की धरती का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने देंगे : राष्ट्रपति मिन आंग

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत की यात्रा पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्ह्लाइंग के साथ वार्ता की। इस दौरान सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे उठे। बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि राष्ट्रपति मिन ने आश्वासन दिया है कि म्यांमार की धरती का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। उनका देश विद्रोही समूहों को लेकर भारत की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है और उनके खिलाफ कार्रवाई करने

के लिए हर संभव प्रयास करेगा। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में

म्यांमार के भीतर अस्थिरता बढ़ने के कारण सीमा पार सक्रिय सशस्त्र समूहों की आवाजाही, अवैध तस्करी और अन्य सुरक्षा चुनौतियों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

पीएम मोदी ने म्यांमार में शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों में

भारत की तत्परता व्यक्त की। ह्लाइंग अप्रैल में हुए चुनावों के बाद म्यांमार के 11वें राष्ट्रपति बने हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले वे देश के सैन्य प्रमुख थे।

क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग करेंगे

दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स पर करीबी सहयोग बनाए रखने पर सहमति जताई है। पीएम मोदी ने जोर दिया कि बेहतर संपर्क से क्षेत्र में लाभकारी आर्थिक संबंध और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। दोनों पक्षों ने कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार थाईलैंड राजमार्ग को पूरा करने पर भी बात की।

चीन से मुकाबले के लिए म्यांमार है जरूरी

म्यांमार भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का अहम हिस्सा है। चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत, म्यांमार को रणनीतिक बफर स्टेट के रूप में देखता है। बंगाल की खाड़ी में चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव के जवाब में भारत ने म्यांमार के रखाइन राज्य में स्थित सित्तवे बंदरगाह का विकास किया है। इससे भारत को रणनीतिक बढ़त मिलेगी।

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