मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद बना सिफारिश फंड, सांसद जांगड़े पर रिश्तेदारों और करीबियों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप

जांजगीर/सक्ती। गरीब, बीमार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री है। जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद कमलेश नियम-कायदो, मापदंडों को दरकिनार कर सक्ती जिले के अपने करीबी लोगों के लिए करीब को भारी भरकम राशि सहायता कराई है जिसका सामने आई सूची ने पूरे मामले को और भी विवादित बना दिया है। सूची में ‘जांगड़े’ सरनेम वाले कई नाम शामिल हैं, जिन्हें सहायता राशि दिलवाई गई है। आरोप है कि इनमें सांसद के चाचा भतीजा, बहू और अन्य करीबी रिश्तेदार शामिल हैं। यही नहीं कई ऐसे लोगों को भी अनुदान दिलवाया गया जिन्हें स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से सक्षम माना जाता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मुख्यमंत्री स्वेच्चानुदान मद का वास्तविक उद्देश्य क्या है? क्या यह योजना गंभीर बीमारी, दुर्घटना और आर्थिक संकट से जूझ रहे गरीब परिवारों के लिए बनाई गई थी या फिर जनप्रतिनिधियों पोतों को लाभ पहुंचाने का माध्यम वन चुकी है? सूत्रों मुताबिक, कई मामलों में पात्रता की जांच तक ठोक से नहीं हुई और सीधे सिफारिश के आधार पर राशि स्वीकृत करवा दी गई। आरोप यह भी है कि जिन गरीब परिवारों को वास्तव में मदद की जरूरत थी, वे आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं जबकि राजनीतिक पहुंच रखने बालों के खाते में सीधे सहायता पहुंच गई। सूची में सामिल कुछ नामों को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। लोगों कहना है कि यदि एक ही लोगों को लगातार लाभ मिल रहा है, तो यह केवल संयोग नहीं हो सकता। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। यह मामला अब केवल अनुदान राशि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। जनता सांसद को इसलिए सुनती है कि वह पूरे क्षेत्र की आवाज बने, लेकिन यदि सरकारी योजओं का लाभरिश्तेदारों और करीबियों तक समित होने लगे तो लोकतंत्र की भावना ही कमजोर पड़ जाती है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अब मांग रही है कि मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान मद की स्वीकृत सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हो ।लाभार्थियों को पात्रता सार्वजनिक की जाए, सांसद को सिफारिश और लाभार्थियों के रिश्तों की जांच कराई जाए, अपात्र लोगों को जारी राशि की वसूली हो। क्या मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद गरीबों की राहत योजना है, या फिर नेताओं के रिशतेदारों और करीबियों के लिए आरक्षित विशेष कोष?
भाजपा पदाधिकारियों के नामों ने भी बढ़ाया विवाद
छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग रायपुर से 31 मार्च 2006 को जारी सूची में कुल 293 लोगों ( के नाम शामिल हैं। सबसे चौकाने गाली बात यह है कि सभी हितग्राही केवल सकी जिले के बताए हैं। जबकि लोकसभा क्षेत्र क्षेत्र में शामिल जांजगीर-चांपा जिले से एक भी जरूरतमंद को अनुदान नहीं दिया जाना बहस का विषय बन चुकी है। विषाद उस समय और गहरा गया जब सूची में भाजपा से जुड़े कई राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों के नाम सामने आने लगे। आरोप है कि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद जो वास्तव में गरीब और संकटग्रस्त लोगों के लिए गई थी, उसका उपयोग राजनीतिक समर्थकों ल को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। सूची में जांगड़े सरनेम वाले कई नाम भी सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इनमें सांसद के रिश्तेदार और करीबी लोग शामिल हैं। ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो गया है कि क्या सहायता राशि वास्तव में जरूरत और पात्रता के आधार पर दी गई या कि राजनीतिक और पारिवारिक नजदीकी इसका नया मापदंड बन गई?
