डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन व्यवसायों की बढ़ी परेशानी

कोरबा 29 मई। बस संचालकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन व्यवसाय की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर कोरबा-चांपा मार्ग पर लगने वाले टोल टैक्स ने बस ऑपरेटरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई बस संचालकों को रोजाना का संचालन खर्च निकालना भी मुश्किल पड़ रहा है।
कोरबा से चांपा, बिलासपुर, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लिए चलने वाली यात्री बसें प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन हैं, लेकिन लगातार बढ़ रहे खर्च के कारण अब बस संचालकों के सामने संचालन जारी रखना चुनौती बनता जा रहा है। बस मालिकों का कहना है कि डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि यात्री किराए में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हो पा रही है। इसके कारण आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कई बार डीजल की उपलब्धता प्रभावित होने से बसों का संचालन बीच रास्ते में प्रभावित हो रहा है। संचालकों का कहना है कि डीजल की किल्लत के कारण कई बार बसें समय पर ईंधन नहीं भरवा पातीं, जिससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। कुछ मामलों में बसों को रास्ते में खड़ा करना पड़ रहा है, जिससे यात्री घंटों परेशान होते हैं।
कोरबा-चांपा मार्ग पर संचालित टोल प्लाजा भी बस ऑपरेटरों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। बस संचालकों का कहना है कि प्रतिदिन टोल टैक्स के रूप में बड़ी राशि चुकानी पड़ती है। लंबी दूरी तय करने वाली बसों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले ही डीजल, वाहन मेंटेनेंस, कर्मचारियों के वेतन और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है, ऊपर से टोल टैक्स ने अतिरिक्त बोझ बढ़ा दिया है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में कई छोटे संचालकों को बस संचालन बंद करने की नौबत आ सकती है। इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ेगा, क्योंकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग आज भी बस सेवा पर सबसे अधिक निर्भर हैं। यात्रियों ने भी माना कि पिछले कुछ समय से बसों के संचालन पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। कई बार बसें लेट हो रही हैं और गर्मी के मौसम में रास्ते में रुकने से यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासकर मजदूर वर्ग, छात्र और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
