अब अमरीका, चीन और रूस की टक्कर का फाइटर जेट बनाएगा भारत

नई दिल्ली. अमरीकी एफ-35, चीनी जे-35 और रूसी सुखोई-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को टक्कर देने के लिए भारत स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान बनाने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय की एरोनॉटिकल डवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने पांच उड़ान प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट मॉडल तैयार करने का प्रस्ताव प्री-क्वालीफाइड कंपनियों से मांग लिया है।

भारतीय वायु सेना की जरूरत के अनुसार विकसित किया जा रहा एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) ट्विन-इंजन से लैस होगा। इसके साथ ही यह मीडियम-वेट, मल्टी-रोल और लो-ऑब्जर्वेबल भी होगा। एएमसीए का विकास भारतीय वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। वायु सेना के पास 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृति है लेकिन स्क्वाड्रन घटकर 30 रह गए हैं। वायु सेना के बेड़े में इस समय रफाल, सुखोई-30 एमकेआइ, मिग-29, मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस एमके।ए जैसे विमान शामिल है। एएमसीए का सफल विकास भारत को उन देशों के साथ लाकर खड़ा कर देगा जो पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम है।

क्या है एएमसीए ?

एएमसीए को अमरीका के एफ-35, चीन के जे-35 और रूस के सुखोई-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में विकसित किया जा रहा है। विमान में स्टील्थ तकनीक, रडार-अवशोषित सामग्री और इंटरनल वेपन कैरिज जैसी क्षमताएं होंगी। इसे एयर सुपीरियोरिटी और ग्राउंड अटैक जैसे कई अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। इसका विकास बेंगलूरु स्थित एडीए कर रही है, जिसने तेजस को भी डिजाइन किया था। एएमसीए के विकास के लिए सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।

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