समुद्र में तेल और गैस खोजेगा भारत, करेगा 1.50 लाख KM भूगर्भीय रेखाओं का अध्ययन

नई दिल्ली. ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा भारत अब बंगाल की खाड़ी से अंडमान तक समुद्र में तेल और गैस की बड़े स्तर पर तलाश करेगा। महानिदेशक हाइड्रोकार्बन ने बंगाल, पूर्णिया, महानदी, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी और अंडमान बेसिन में भूकंपीय तथा गुरुत्वाकर्षण-चुंबकीय सर्वेक्षण के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत करीब डेढ़ लाख किलोमीटर लंबी भूगर्भीय रेखाओं का अध्ययन होगा।
भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार बंगाल बेसिन की गहरी तलछटी परतों में हाइड्रोकार्बन मिलने की संभावना मजबूत है। वहीं अंडमान बेसिन की भूवैज्ञानिक संरचना म्यांमार और इंडोनेशिया जैसी मानी जा रही है, जो बड़े गैस उत्पादक देश हैं। भारत फिलहाल प्रतिदिन 58 लाख बैरल तेल की खपत करता है, जिसमें अधिकांश आयातित है। ऐसे में वैश्विक संकट और पश्चिम एशिया तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह खोज उत्पादन में बदलती है तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को बड़ा सहारा मिलेगा।
बाड़मेर में तेल तलाशने में लगे थे 15 साल : डॉ. तनेजा
इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र तनेजा के अनुसार तेल और गैस की खोज लंबी और जटिल प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के बाड़मेर में तेल खोजने में करीब 15 साल लगे थे। पहले ओएनजीसी, फिर ब्रिटेन की कंपनी शेल ने तलाश किया और सरेंडर किया, फिर एक छोटी-सी कंपनी टिंड एनर्जी ने यहां तेल की खोज की। उनके मुताबिक, समुद्र में तेल खोजना, उत्पादन शुरू करना और चांद पर जाना बराबर है। सर्वेक्षण से उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया में आठ से दस साल लग सकते हैं।
