अफसरों के नाम से पंच ने वसूले 9 हजार, तीन दिन में होगी जांच

परित्यक्ता की रूकी पेंशन का मामला, जिपं सीईओ सख्त

कोरबा 14 मई। सुशासन तिहार के बीच कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्र में एक निर्वाचित पंच ने किसी और से नहीं बल्कि परित्यक्ता गायत्री प्रजापति से 9 हजार रुपए ऐंठ लिए। उसकी रूकी पेंशन के लिए इसे जरूरी बताया गया। मामले की शिकायत के बाद सीईओ जिला पंचायत ने लेखा परीक्षक सहित तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसे जांच करने कहा गया है।

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय की सरकार ने आर्थिक मनमानी और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में सख्ती बरतने की नीति बना रखी है। ढाई साल के कार्यकाल में इस तरह की शिकायतों पर राज्य की जांच एजेंसिया एसीबी और पीओडब्ल्यू ने छोटे-बड़े मुद्दों को जाल में फंसाने के साथ अपराध दर्ज किया और जेल का रास्ता दिखाया। अब अनियमितता से जुड़े एक प्रकरण में विकासखंड कोरबा की रजगामार पंचायत निवासी गायत्री प्रजापति से किसी और ने नहीं बल्कि पंच जितेंद्र राठौर ने 9 हजार रुपए ऐंठ लिए। महिला ने 8 हजार की बात कही तो कई तर्क दिए गए और फिर पूरी राशि ले ली गई। 9 हजार की व्यवस्था कर गायत्री ने अपनी समस्या हल कराने का इंतजाम किया और फिर इसकी शिकायत कलेक्टर कोरबा से कर दी। जिस पर सीईओ को अवगत कराया गया। सीईओ जिला पंचायत दिनेश नाग ने इस मसले को गंभीरता से लिया और प्रकरण की जांच कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। इसमें सहायक लेखा अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा जयश्री अग्रवाल, ज्योति राज एडीईओ जनपद पंचायत कोरबा और चतुरानंद सिंह कंवर सहायक आंतरिक लेखा परीक्षक जनपद पंचायत कोरबा को शामिल किया गया है। तीन दिन में इसे जांच करने कहा गया है। याद रहे रजगामार पंचायत में लंबे समय से कई मसलों को लेकर विवाद की स्थिति बनी है और पंचायत द्वारा कराए गए उन कार्यों के भुगतान पर प्रशासन ने रोक लगा दी है, जो कार्य खुद सरकार ने मंजूर किए हैं।

महिला सशक्तिकरण की प्रजापति बनी मिसाल
पंचायत क्षेत्र में अवैध कार्यों में लिप्त लोगों के खिलाफ सामान्य जन जल्दी से आक्रामक होने से बचते हैं। उनका मानना होता है कि आखिर पानी में रहकर मगरमच्छ से कौन बैर करे। इन सबके बावजूद रजगामार की गायत्री प्रजापति ने आधी आबादी के सच को साबित करते हुए अपने साथ हुए अन्याय को लेकर आवाज उठाई और जांच के आदेश करने को अफसर को मजबूर कर दिया। पूर्व गृहमंत्री के प्रतिनिधि अनिल चौरसिया ने कहा कि यह महिलाओं के सशख्त होने का एक छोटा सा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सही मायने में महिला सशक्तिकरण के प्रयास के लिए गायत्री का सम्मान होना चाहिए।

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