भाजपा ने वादा निभाया तो प. बंगाल पर आएगा 1.50 लाख करोड़ रुपयों का अतिरिक्त भार

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भाजपा ने घोषणापत्र में कई बड़े वादे किए थे। विभिन्न योजनाओं को जोड़कर अनुमान लगाया जाए तो इस पर होने वाला. कुल अनुमानित खर्च 1.20 लाख करोड़ से 1.50 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष पहुंच सकता है। यह राज् य के बजट पर भारी दबाव डाल सकता है। सबसे बड़ा वित्तीय बोझ महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए देने की योजना से आने की संभावना है। अगर माना जाए कि लगभग 2 करोड़ महिलाएं योजना के दायरे में आएंगी, तो सालाना खर्च 72000 करोड़ रुपये बैठता है। बेरोजगार युवाओं को भी 3000 रुपए प्रति माह भत्ता देने का वादा भी किया गया है। अगर करीब 50 लाख युवा इस योजना का लाभ लेते हैं, तो सालाना लगभग 18000 करोड़ खर्च होंगे।

राज्य में फ्री बिजली-इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च 30000 करोड़ रुपए

200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने और 10 शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 30000 करोड रुपये खर्च करने की योजना हैं।

कोलकाता को ‘भविष्य का शहर’ बनाने के लिए 22000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

सड़कों के विकास के लिए केंद्र के साथ मिलकर 1 लाख करोड रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमिहीन किसानों को सालाना 4000 रुपये देने, 20000 करोड़ रुपये का कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनेगा।

किसानों के लिए 5000 करोड़ रुपये का फंड प्रस्तावित।

7वें वेतन आयोग से बोझ

सरकारी कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग को लागू करने और महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का असर भी राज्य के वित्त पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे सालाना करीब 15000 से 20000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ आ सकता है।

Spread the word