शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लाई एश का दंश लोगों के लिए बना समस्या

कोरबा 29 मार्च। चाहे प्रशासन का डण्डा हो या एनजीटी के दिशा-निर्देश, औद्योगिक जिले कोरबा में बिजली घरों से निकलने वाली फ्लाई एश के कारण हो रही समस्या निराकृत नहीं हो सकी। गर्मी का मौसम शुरू हुआ कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लाई एश का दंश लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। इतना जरूर है कि समय-समय पर अधिकारी समस्या को नियंत्रित करने के दावें करने से पीछे नहीं है। लेकिन स्थिति यह है कि ये दावें कागजों में सिमट कर रह गये है।
कोरबा में फ्लाई एश से जुड़ी समस्या के पीछे असली कारण यहीं है कि इसके सुरक्षित निराकरण को लेकर न तो ठोस योजना बन सकी और न ही इसे जमीन पर उतारा जा सका। 2600 मेगावॉट वाली एनटीपीसी, 1340 मेगावॉट वाली सीएसईबी पश्चिम, 500 मेगावॉट की डीएसपीएम, 1200 मेगावॉट वाली बालको सहित निर्माणाधीन केपीएल सहित कई निजी परियोजनाओं में उत्पादन की प्रक्रिया के लिए हर रोज कई लाख टन कोयला की खपत हो रही है। बिजली उत्पादन की प्रक्रिया के बाद कोयला का बचा हुआ तत्व राखड़ के रूप में निकलता है। प्रबंधनों ने इसके रख-रखाव के लिए गोढ़ी, धनरास, बालकोनगर और छिरहूट आदि इलाकों में एशपॉण्ड बना रखे है। कई मौके पर इनकी रेजिंग बढ़ाने का काम भी किया जा चुका है। एनजीटी के निर्देश पर हर हाल में एश पॉण्ड का नमीयुक्त रखना है ताकि हवा चलने पर ऊपरी परत से फ्लाई एश उड़ न सके। इसके बावजूद देखने को मिल रहा है कि आधी की स्थिति में कोरबा नगर, बालकोनगर, जमनीपाली से लेकर आसपास का बड़ा हिस्सा राखड़ के आगोश में समा जाता है। जन-जीवन, जन स्वास्थ्य और आवागमन से जुड़ी समस्याएं इसके चलते पेश आती है। गर्मी का मौसम शुरू हुआ तो यह समस्या सुरसा की तरह सामने आ गई। लोगों की प्रतिक्रिया है कि कई बार नेताओं के साथ अधिकारियों ने फ्लाई एश उडने से होने वाली समस्या के स्थाई समाधान के सपने जरूर दिखाये लेकिन यह सच होता नजर नहीं आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार कनकी तरदा मार्ग पर पिछले कुछ दिनों से फ्लाई एश ढम्प की जा रही है। कहा जा रहा है कि अनुबंध के तहत कोई ट्रांसपोर्टर इस काम को कर रहा है लेकिन उसके पास किस जगह की अनुमति है यह स्पष्ट नहीं हुआ है। इस बीच इस प्रकार की जानकारी सामने आ रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खाली जमीन को कब्जाने के इरादे से ऐसी कोशिश हो रही है।
