नागपुर में बस्तर के साहित्य की गूंज: त्रिलोक महावर के कविता संग्रह का अंग्रेजी और गुरुमुखी में अनुवाद का हुआ लोकार्पण..!

नागपुर। विगत दिनों नागपुर में आयोजित भव्य समारोह में बस्तर अंचल के सुप्रसिद्ध कवि और साहित्यकार त्रिलोक महावर की कविता संग्रह नदी के लिए सोचो का अंग्रेजी एवं एवं गुरुमुखी पंजाबी भाषा में अनुवादित संस्करण का लोकार्पण हुआ।
2021 में हिंदी में प्रकाशित इस कविता संग्रह को ग्वालियर में राष्ट्रीय स्तर पर कृति सम्मान से नवाजा जा चुका है। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कवियत्री तथा साहित्यकार सुश्री नीतू गुजरात सिंगापुर से विशेष रूप से इस समारोह में उपस्थित हुई थी । नीतू गुजराल ने गुरुमुखी पंजाबी में अनुवाद किया है। उन्होंने अनुवाद की प्रक्रिया के बारे में बताया तथा तथा नदी और बाघिन कविता का सुंदर अनुवाद भी पढ़कर सुनाया जिसे उपस्थित जनों द्वारा बहुत सराहा गया। दिल्ली के जाने माने साहित्यकार श्री गिरीश मेहता ,जिन्होंने अंग्रेजी में अनुवाद किया है, अपना लिखित वक्तव्य प्रेषित किया था।

कविता सत्र की अध्यक्षता करते हुए त्रिलोक महावर ने आयोजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और नदी के लिए सोचो हिंदी संस्करण के अंग्रेजी और पंजाबी अनुवाद के प्रकाशन के लिए अथक परिश्रम लगन के लिए सृजन बिंब की सीएमडी सुश्री रीमा दीवान जो स्वयं भी बस्तर अंचल की प्रतिभा हैं , की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की।
नागपुर में वामा मंच द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव में
विमोचन समारोह में पद्मश्री धारक डॉक्टर जनक पलटा मगलिगन (इंदौर, मध्यप्रदेश) और सुश्री शमशाद बेगम (बलौदा, छत्तीसगढ़) के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कवयित्री डॉक्टर कीर्ति काले (दिल्ली) और सुश्री नीतू गुजराल (सिंगापुर) भी शामिल हुईं। अन्य उपस्थित प्रतिष्ठित हस्तियों में नागपुर से सीए सुश्री श्वेताली ठाकरे और डॉक्टर तेजिंदर सिंह रावल शामिल रहे। आयोजन सृजन बिंब प्रकाशन, नागपुर की निदेशक सुश्री रीमा दीवान चड्ढ के प्रतीकात्मक गीतों का समावेश किया गया संगीत प्रेमियों साहित्यकारों ने इस कृति की सराहना करते हुए इसे समाज और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया। उल्लेखनीय है कि नागपुर की साहित्यिक संस्था वामा विमर्श मंच ने इस भव्य आयोजन में देश विदेश से सशक्त महिलाओं एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को आमंत्रित किया। महोत्सव में कविता कहानी के साथ स्त्री विमर्श, स्त्री सशक्तिकरण एवं लघुकथाओं पर गहन चर्चा की।

देश की दो सशक्त स्त्रियाँ जब मंच पर सादगी और उत्साह से अपने कार्य को बता रहीं थीं तो रही हाॅल करतल ध्वनियों से गूंज उठा । ये थीं पर्यावरण हित में बरसों की साधना करने वाली पद्मश्री डाॅ. जनक पलटा मगिलिगन जी और महिला कमांडों को प्रशिक्षित कर गांव सुधार करने वाली छत्तीसगढ़ की शमशाद बेगम।
कविता सत्र में सभागार में उपस्थित स्त्रियाँ सचमुच आत्मविश्वास से भर उठीं। जब अंतर्राष्ट्रीय कवियत्री कीर्ति कालेजी ने उन्हें कॉन्फिडेंट लड़कियां संबोधित किय। नीतू गुजराल की पंजाबी कविता ने सबका बचपन लौटा दिया।
याद औंदिया बहोत ने मेरियाँ बचपण दीयां सहेलियाँ
गलवखरियाँ पौंदियाँ गीटे खेडदियाँ
कविता सत्र में अनेक डॉ जनक पलटा मगिलिगन सहित अनेक कवि कवयित्रियों ने कविताएं पढ़ी। कविता सत्र की अध्यक्षता प्रशासन अकादमी रायपुर के संचालक और सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार त्रिलोक महावर ने की मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय कवियत्री ज्योति काले थीं। संचालन डा वसुंधरा राय व तनवीर खान ने किया।
एक अन्य सत्र में कार्यक्रम अध्यक्ष सीए श्वेताली ठाकरे जी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी संरक्षक किशन शर्मा जी की उपस्थिति गरिमा पूर्ण रही। संचालन वी.एम.वी.महाविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. आभा सिंह जी ने किया।
आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और आभा आसुदानी के सुरीले कंठ से निकली देवी माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। वामा विमर्श मंच की अध्यक्ष रीमा दीवान चड्ढा ने आयोजन की संकल्पना और अपनी संस्था का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने बताया कि वे सौन्दर्य से शक्ति की ओर बढ़ती महिलाओं को कलम की साधना के साथ और सशक्त करना चाहतीं हैं। इस हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को एकजुट करने का प्रयास संस्था के माध्यम से कर रही हैं।
अगले चरण में अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली वामा सखियों को *वामा सम्मान से विभूषित किया गया, जिनमें *अश्वनी बेंडे, डाॅ.अल्पना त्रिवेदी गिरि, ख़ुदेजा खान*, *डाॅ.रीभा चावला, आत्मिका कपूर ठक्कर, किरण कैलासवार, अर्चना सिंह सोनी, प्रभा ललित सिंह, निधि नितिन तेलगोटे, *डाॅ.मीनल नागपुरे , *डाॅ. सायली संजीव सारडे तथा *रीमा दीवान चड्ढा* को स्मृति चिन्ह, शाल व धनराशि दी।
पुस्तक लोकार्पण सत्र के अध्यक्ष थे CA तेजिंदर सिंह रावल जो विभिन्न भाषाओं के ज्ञाता, कई महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखक व नागपुर बुक क्लब के अध्यक्ष हैं। सारस्वत अतिथियों में CA हेमंत लोढ़ा जी जिनकी अध्यात्म, संस्कृति, संस्कार के साथ देश की महत्वपूर्ण कृतियों एवं विषयो के ज्ञाता विशिष्ट अतिथि थे नागपुर के हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर नीरज व्यास इन वरिष्ठ साहित्यकारों ने कई पुस्तकें लोकार्पित की जिनमें नीलिमा करैया की अंतत: शामिल है।

” स्त्री विमर्श कितना किताबी कितना ज़मीनी ” इस विषय पर वक्ताओं ने अपने उत्कृष्ट विचार मंच पर प्रस्तुत किये।
इस सत्र की अध्यक्षता डॉ गोविंद प्रसाद उपाध्याय जी ने की, जो पावन परंपरा पत्रिका के संपादक हैं। वक्ताओं में साहित्यकार प्रभा ललित सिंह, मालवा इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस व मैनेजमेंट इंदौर की प्राचार्या डाॅ. संगीता सिंघानिया भारूका, भोपाल के कला पत्रकार और साहित्यकार दीपक पगारे, इवनिंग टाइम्स बिलासपुर के संपादक नथमल शर्मा तथा लखनऊ से पधारीं विदुषी रिंकु मणिकर्णिका मंचासीन थे। इस सत्र का सफलतापूर्वक संचालन प्रो. डॉ. शुचिस्मिता मिश्रा ने किया, जो वी.एम.वी महाविद्यालय नागपुर की इतिहास विभाग प्रमुख हैं।
गद्य साहित्य के सत्र की अध्यक्षता जहाँ पी.डब्लयू .एस .के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ मिथिलेश अवस्थी जी ने संभाली और सत्र को समेटते हुये अपना आत्मीय वक्तव्य दिया। वहीं सारस्वत अतिथि थे वरिष्ठ साहित्यकार जयशंकर जी, जिन्होंने एक कहानी के माध्यम से बहुत गहरी सीख दी। नीलिमा करैया जी ने गद्य विधा पर बात की। अनीता दुबे ने प्रस्तर शिल्प पर प्रकाश डाला तो डाॅ.मीनाक्षी देब ने स्त्री स्वास्थ्य पर बात की, दीपाली देवकर ने अपनी लेखन यात्रा के बारे में बताया, वास्तुकला पर आर्किटेक्ट रौशनी अड़सोड़ ने बात की। संचालन आरती सिंह एकता ने किया। लघुकथा सत्र में वंदना सहाय, डाॅ.अल्पना आर्य, करमजीत कौर, शगुफ़्ता यास्मीन, तनवीर खान, वैशाली चरथल
और पूर्णिमा विश्वकर्मा ने लघुकथा पढ़ी। संचालन कविता बिजौलिया ने किया।
अंतिम सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुये।
योगेश अनेजा, महेश तिवारी, अनिल त्रिपाठी, संदीप अग्रवाल, सूरज तेलंग, टीकाराम साहू, डाॅ.प्रेमलता तिवारी, मधु पटौदिया, डाॅ.मीनाक्षी सोनवणे, कविता सिंघल, शालिनी अरोरा, नीलिमा गुप्ता, स्मिता देशमुख, नमन अनेजा और छाया श्रीवास्तव प्रमुखता से उपस्थित थे।
रिंकू घोष का बनाया वामा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नागपुर 2026 का नाम लिए बना खूबसूरत केक बहुचर्चित रहा।
नागपुर में साहित्य और शक्ति को समर्पित इस एक दिवसीय आयोजन ने एक इतिहास रच दिया।
